मुरौल में करोड़ों की सरकारी इमारतें बदहाल, नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय किराये के भवन में चलाने पर अड़ा,जवाब कौन देगा?
मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर जिले के मुरौल और सकरा प्रखंडों में इन दिनों प्रशासनिक निर्णयों को लेकर हलचल तेज है। प्रशासन की ओर से पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए दो अलग-अलग कवायदें चल रही हैं—मुरौल में ‘पुलिस ओपी’ (OP) खोलने की कोशिश और सकरा बाजिद पंचायत में ‘एस.डी.पी.ओ. कार्यालय’ की स्थापना। न्यूज़ भारत टीवी की पड़ताल में जहाँ मुरौल में विरोध के बाद प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े हैं, वहीं सकरा में ग्राम कचहरी कार्यालय को बगल में शिफ्ट कर जगह खाली करवाई जा रही है।

तस्वीर: सकरा स्थित कार्यालय का दृश्य जहाँ पुलिस दफ्तर के लिए रंग रोगन की चल रही हैं तैयारियां
मुरौल: जन-विरोध के आगे प्रशासन का रुख बदला
मुरौल में ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन’ को पुलिस ओपी में तब्दील करने की प्रशासनिक योजना को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का तर्क था कि पंचायत सरकार भवन जन-सेवा के लिए है, न कि पुलिस चौकी के लिए। जनता की नाराजगी और विरोध को देखते हुए, प्रशासन अब मुरौल में ओपी के लिए ‘पंचायत सरकार भवन’ के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है।
सकरा: ग्राम कचहरी शिफ्ट, एस.डी.पी.ओ. कार्यालय की राह साफ
दूसरी ओर, सकरा प्रखंड के अंतर्गत ‘सकरा बाजिद पंचायत’ में स्थिति कुछ अलग है। यहाँ प्रशासन ने एस.डी.पी.ओ. कार्यालय खोलने के लिए पूरी तैयारी कर रही है। सरपंच कुंदन तिवारी ने पुष्टि की है कि एस.डी.पी.ओ. कार्यालय के लिए जगह बनाने हेतु ‘ग्राम कचहरी कार्यालय’ को बगल में ही शिफ्ट किया जा रहा है, ताकि प्रशासनिक कार्य बिना बाधा के शुरू हो सके।
अधिकारियों का पक्ष: क्या बोले ज़िम्मेदार?
न्यूज़ भारत टीवी ने जब प्रशासनिक अधिकारियों से इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा, तो उनके बयानों में दो अलग तरह की स्थितियां दिखीं।
1. सकरा थानाध्यक्ष का बयान: जब हमने उनसे मुरौल में ओपी खुलने की चर्चा और स्थल चयन के बारे में पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी कोई आधिकारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। थानाध्यक्ष ने कहा:
“अभी मुरौल में थाना (ओपी) के लिए स्थल चिन्हित नहीं हुआ है। फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। संभवतः जब ऊपर से कोई आधिकारिक आदेश आएगा, तभी हम इस पर कोई ठोस कार्रवाई कर पाएंगे। फिलहाल स्थिति यथावत है।”
2. एस.डी.पी.ओ.-2 (पूर्वी) का बयान: एस.डी.पी.ओ. ने इस बात की पुष्टि की है कि कार्यालयों को लेकर योजनाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा:
“मुरौल में जो ओपी खोलने की बात है, उसके लिए फिलहाल स्थल की तलाश की जा रही है। अभी दो-तीन जगह देखी गई है, अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर सब तय हो जाएगा। वहीं, जहाँ तक एस.डी.पी.ओ. कार्यालय की बात है, तो उसका स्थल सकरा में ही चिह्नित कर लिया गया है और उसे वहीं शिफ्ट किया जा रहा है।”

“सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन “वर्सेज नगर पंचायत मुरौल कार्यालय
खबर का एक अन्य कानूनी और नैतिक सवाल जनहित की अनदेखी और नगर पंचायत मुरौल की प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है –
इस पूरे मामले में केवल प्रशासनिक मनमानी ही नहीं, बल्कि सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने और जन-धन की बर्बादी के गंभीर प्रश्न भी खड़े हो रहे हैं। नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने नगर पंचायत मुरौल के प्रशासनिक कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है।
नगर पंचायत मुरौल के कार्यालय संचालन और सरकारी नियमों की अनदेखी को लेकर वार्ड पार्षद आनंद कंद साह ने नगर विकास एवं आवास विभाग के स्पष्ट निर्देशों का हवाला देते हुए प्रशासन को घेरा है। पार्षद आनंद कंद साह ने नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना (पत्रांक 15/अभि०-10-01/2025-1284, दिनांक 03.04.2025) का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार, यदि किसी नवगठित नगर निकाय में ‘पंचायत सरकार भवन’ उपलब्ध है, तो कार्यालय को अनिवार्य रूप से उसी भवन में स्थानांतरित किया जाना चाहिए । पार्षद का तर्क है कि विभाग का यह स्पष्ट दिशानिर्देश राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया था, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग न हो । इसके बावजूद, अधिकारियों द्वारा राज्य सरकार के स्वामित्व वाले उपलब्ध बुनियादी ढांचे (पंचायत सरकार भवन) को छोड़कर निजी किराये के भवन में कार्यालय जारी रखना सरकारी नीतियों की खुली अवहेलना और ‘शक्ति का दुरुपयोग’ है । उन्होंने पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि “सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन, नगर पंचायत मुरौल के कार्यालय के लिए एक आवश्यक एवं महत्वपूर्ण विकल्प है ।

आनंद कंद साह का कड़ा बयान:
“सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या 2 में स्थित है और यह हमारे नगर पंचायत के अधिकारिक पोषक क्षेत्र के अर्न्तगत है। नियम और सरकारी प्रावधानों के अनुसार, नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय इसी सरकारी भवन में संचालित होना चाहिए था। लेकिन विडंबना देखिए कि यहां जनता के टैक्स के पैसों की बर्बाद हो रहा है और नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय किराये के भवन में चलाया जा रहा है। क्या प्रशासन यह जवाब देगा कि खाली सरकारी भवन रहते हुए किराया पर भवन लिए जाने की क्या जरूरत है?”
पार्षद आनंद कंद साह ने इसके कानूनी पहलुओं पर जोर देते हुए आगे कहा:
“इतना ही नहीं, वर्तमान में जो कार्यालय किराये पर चल रहा है, वह किसी भी तरह से दिव्यांग-अनुकूल नहीं है। यह ‘द राइट टू पर्सन विद डिसेबिलिटी एक्ट 2016′ का सीधा उल्लंघन है। हम लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकारी भवन में कार्यालय शिफ्ट किया जाए, जिससे जनता को भी सुविधा मिले और दिव्यांगजन भी आसानी से सरकारी लाभ ले सकें। प्रशासन नियमों को धता बताकर क्या साबित करना चाहता है?”
दानदाताओं की भावना का अपमान: इस मामले में सबसे ज्यादा आहत वे लोग हैं जिन्होंने लोक-कल्याण के लिए अपनी जमीन दी थी। स्वर्गीय सत्यनारायण प्रसाद के परिवार के सदस्यों ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है:
“हमने यह जमीन ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन‘ के लिए दी थी, ताकि क्षेत्र के निवासियों को प्रशासनिक और जन-सुविधाएं मिल सकें। आज जब भवन खाली पड़ा है और प्रशासन इसे जन-सेवा के बजाय अन्य कार्यों में लाने की कोशिश कर रहा है, तो यह दानदाताओं की मूल मंशा के साथ-साथ लोक-कल्याणकारी भावना का भी घोर अपमान है। जमीन जिस प्रयोजन के लिए दी गई थी, उसे उसी उद्देश्य के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए, न कि प्रशासनिक मनमानी का केंद्र बनाकर।”
न्यूज़ भारत टीवी की विशेष टिप्पणी: “सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन “वर्सेज नगर पंचायत मुरौल कार्यालय के मामले में प्रशासन का यह रवैया न केवल सरकारी निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि यह क्षेत्र की जनता के हितों के साथ खिलवाड़ भी है। जब नगर पंचायत का अपना कार्यालय किराये पर चल रहा है, तो प्रशासन द्वारा सरकारी भवन को पुलिस दफ्तर बनाने की जिद कई सवालों को जन्म देती है। प्रशासन को जवाब देना होगा कि वह जनता के हित को सर्वोपरि रखेगा या अपनी मनमानी चलाएगा?






















