Thursday, June 11, 2026

‘बेंग के मूतने से समस्‍तीपुर के दहने की नौबत’! कहावत चरितार्थ हुई, नरकीय पानी में डूबे वीआईपी मोहल्ले!

समस्तीपुर नगर निगम का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल: पहली ही रिमझिम ने खोली विकास के दावों की पोल!

समस्तीपुर | 11 जून | समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र के निवासियों के लिए बृहस्पतिवार की सुबह एक गहरा झटका लेकर आई। सुबह-सुबह हुई बेहद हल्की और नाममात्र की वर्षा ने नगर निगम प्रशासन के उन तमाम बड़े-बड़े दावों को पूरी तरह से धो दिया, जिनमें जल निकासी के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने की बात कही जाती है। शहर के तथाकथित वीआईपी और आम रिहायशी इलाकों की सूरत देखकर ऐसा लग रहा था मानो किसी ने जानबूझकर सड़कों को मलबे और गंदे पानी के तालाब में तब्दील कर दिया हो।

स्थिति इतनी बदतर और हास्यास्पद हो गई कि स्थानीय नागरिकों को पुरानी लोक-कहावत बेंग के मूतने से बाढ़ आना यानी मेंढक के पेशाब करने से भी प्रलय आ जाना, लोगों को याद आ गई। यह व्यंग्यात्मक कहावत आज समस्तीपुर नगर निगम की बदहाल कार्यशैली और कागजी दावों पर शत-प्रतिशत सटीक बैठती है, जहां जरा सी रिमझिम ने पूरे शहर को दहने यानी डूबने की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

विवेक-विहार मोहल्ले की जलमग्न संकरी सड़क, जहां बृहस्पतिवार सुबह हुई बेहद हल्की वर्षा के बाद पूरी गली नाले के गंदे पानी से भर गई। तस्वीर में स्पष्ट दिख रहा है कि जल निकासी ठप होने से रिहायशी इलाके में बाढ़ जैसी नारकीय स्थिति उत्पन्न हो गई है और स्थानीय नागरिक घरों में कैद होने को विवश हैं।

मोहल्लों की दर्दभरी दास्तान: बुनियादी सुविधाओं को तरसती जनता

अगर जमीनी स्तर पर जाकर स्थिति देखा जाए, तो विवेक-विहार मोहल्ले की हालत सबसे ज्यादा दयनीय देखी गई। यहाँ की संकरी गलियां पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे पैदल चलना तो दूर, दोपहिया वाहनों का निकलना भी हादसों को दावत देने जैसा हो गया है। सुबह के समय स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे मासूम बच्चे, दूध विक्रेता, कामकाजी महिलाएं और इलाज के लिए अस्पताल जाने वाले बुजुर्ग इसी सड़े हुए नाले के पानी में पैर डुबोकर गुजरने को मजबूर हुए।

ठीक यही स्थिति काशीपुर और आदर्श नगर की भी रही, जिन्हें समस्तीपुर का मुख्य शैक्षणिक और आवासीय केंद्र माना जाता है। यहाँ सैकड़ों छात्र-छात्राएं कोचिंग और स्कूलों के लिए निकलते हैं, लेकिन सड़कों पर फैले इस नरक के कारण कई बच्चों की कक्षाएं छूट गईं। सरोजनी गली, बारह पत्थर और आजाद नगर में भी जल निकासी का कोई नामोनिशान नहीं मिला, जिससे यहाँ की व्यावसायिक गतिविधियां भी पूरी तरह ठप पड़ गईं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि नगर निगम टैक्स तो समय पर वसूलता है, लेकिन सुविधा के नाम पर केवल गंदा पानी परोसता है।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

समस्तीपुर में जलजमाव को लेकर नगर निगम पर बरसे भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह, डीएम से की जांच की मांग

समस्तीपुर में हुई हल्की बारिश के बाद शहर के विभिन्न मोहल्लों में उत्पन्न हुई जलजमाव की स्थिति पर भाकपा माले के जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने एक वीडियो बयान जारी कर नगर निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जल निकासी, नाला सफाई और मरम्मत के नाम पर हर महीने होने वाला करोड़ों रुपये का खर्च सिर्फ सरकारी रजिस्टरों तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल इसके उलट है। विवेक विहार, काशीपुर और आदर्श नगर जैसे इलाकों की बदहाली का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मी शिकायतों के बावजूद निरीक्षण करने नहीं आते। माले नेता ने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और विकास राशि की लूट करने वाले दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

सुरेंद्र प्रसाद सिंह, जिला स्थाई समिति सदस्य, भाकपा माले, समस्तीपुर का पूरा बयान:

“एक कहावत चरितार्थ है— बेंग मूतने से बाढ़ आना। यही कहावत चरितार्थ हो रहा है समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र में, जहां पर आज सुबह-सुबह हल्की वर्षा हुई और हल्की वर्षा में समस्तीपुर शहर का कई मोहल्ला में जलजमाव हो गया। करोड़ों रुपया जल निकासी के नाम पर, नाला सड़क निर्माण के नाम पर खर्च दिखाने वाली समस्तीपुर नगर निगम का एक बार फिर पोल खुल गया है।

सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, जिला स्थाई समिति सदस्य, भाकपा माले, समस्तीपुर।

एक भी जगह पर नगर निगम का कर्मी, अधिकारी… कहीं नाला जाम है, कहीं नाला टूटा हुआ है, कहीं और समस्या है, निरीक्षण करने को नहीं जाते हैं, देखते नहीं हैं— चाहे आप जहां भी आवेदन दे दें, जहां भी शिकायत कर दें। यही कारण है कि करोड़ों-करोड़ रुपया प्रति माह समस्तीपुर में नाला पर, सड़क निर्माण पर, जल निकासी पर, नाला की सफाई पर खर्च तो दिखा दिया जाता है लेकिन सिर्फ रजिस्टर में, जमीन पर नहीं उतारा जाता है।

आज आप समस्तीपुर सड़क का चाहे विवेक विहार हो, काशीपुर हो, आदर्श नगर हो, बारह पत्थर हो, आप नजारा देख सकते हैं— एकदम हल्की वर्षा और सड़क पर जलजमाव का नजारा। हम एक बार फिर जिलाधिकारी से भाकपा माले मांग करना चाहेगी कि आप नगर निगम के द्वारा खर्च किया जा रहा नाला पर, सड़क निर्माण पर, नाला सफाई पर, नाला रिपेयर पर जो करोड़ों-करोड़ रुपया हो रहा है, उस कार्य की जांच कराई जाए और जांच करके विकास कार्य को लूटने वाले, रुपया लूटने वाले दोषियों पर कार्रवाई की जाए।”

कागजी रजिस्टर बनाम जमीनी हकीकत: करोड़ों के बजट का वित्तीय गबन

भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह के इस बयान ने नगर निगम के भीतर चल रहे उस काले खेल को उजागर कर दिया है, जिसे अमूमन फाइलों के नीचे दबाकर रखा जाता है। समस्तीपुर नगर निगम के वित्तीय दस्तावेजों को देखें, तो हर महीने नाला निर्माण, पुरानी नालियों की मरम्मती, गाद की सफाई, सड़कों का सुदृढ़ीकरण, कूड़ा उठाव और कीटनाशक रसायनों के छिड़काव के नाम पर करोड़ों-करोड़ रुपये का आवंटन किया जाता है। लेकिन यह पूरी धनराशि केवल अफसरों और ठेकेदारों के रजिस्टरों में ही खर्च होकर सिमट जाती है।

वास्तविकता यह है कि धरातल पर न तो कोई सफाई कर्मी नियमित रूप से दिखाई देता है और न ही जल निकासी की कोई ठोस योजना लागू की जाती है। जनता अपनी शिकायतों को लेकर वार्ड पार्षदों से लेकर नगर आयुक्त तक के दफ्तरों के चक्कर काटती रहती है, परंतु उनके आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। निरीक्षण के नाम पर बड़े अधिकारी अपनी वातानुकूलित गाड़ियों से बाहर तक नहीं निकलते, जिससे निचले स्तर के कर्मियों और कनीय अभियंताओं यानी जेई के हौसले बुलंद हैं।

ठेकेदारों और जेई का नापाक गठजोड़: तकनीकी खामियों का अंबार

इस पूरे ड्रेनेज संकट के पीछे सबसे बड़ी वजह ठेकेदारों और तकनीकी अधिकारियों का वह नापाक गठजोड़ है, जो बिना काम किए ही सरकारी खजाने को चूना लगा रहा है। शहर में जहां कहीं भी नए नालों का निर्माण कराया गया है, वहां तकनीकी मानकों की घोर अनदेखी की गई है। नालों का ढाल (स्लोप) विपरीत दिशा में बना दिया गया है, जिसके कारण पानी आगे बहने के बजाय वापस गलियों और घरों की तरफ बैक मारने लगता है।

कई मुख्य नालों को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया है या उन्हें आपस में जोड़ा ही नहीं गया है। मॉनसून के आगमन से ठीक पहले की जाने वाली ‘प्री-मॉनसून सफाई’ के नाम पर भी इस वर्ष भारी घोटाला किया गया है। कागजों पर सभी छोटे-बड़े नालों से गाद निकालने का दावा किया गया, लेकिन इस पहली ही मामूली बारिश ने सिद्ध कर दिया कि नालों के भीतर वर्षों का कचरा और गाद जस की तस जमी हुई है। इस आपराधिक लापरवाही के लिए कनीय अभियंता (जेई) सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, जो बिना स्थल निरीक्षण के ही ठेकेदारों के फर्जी बिलों को हरी झंडी दे देते हैं।

महामारी की आहट: स्वास्थ्य संकट की दहलीज पर खड़ा शहर

सड़कों पर जमा यह बदबूदार पानी केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि यह समस्तीपुर में एक बड़े स्वास्थ्य आपातकाल को भी न्योता दे रहा है। सड़कों और गलियों में कई दिनों तक पानी रुके रहने से उसमें सड़न पैदा हो रही है, जिससे उठने वाली दुर्गंध ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। यह प्रदूषित माहौल मच्छरों और हानिकारक जीवाणुओं के पनपने के लिए सबसे मुफीद नर्सरी बन चुका है।

आने वाले दिनों में अगर तेज धूप निकलती है, तो इस ठहरे हुए पानी के कारण शहर में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टायफाइड, डायरिया और त्वचा से संबंधित संक्रामक बीमारियों का भयंकर प्रकोप फैलना निश्चित है। नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग इस संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह से उदासीन बना हुआ है। पूरे शहर में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव या फॉगिंग मशीन चलाना तो दूर, साधारण चूने का छिड़काव भी नहीं देखा जा रहा है। अगर समय रहते जल निकासी नहीं की गई, तो सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की कतारें लग जाएंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।

जिलाधिकारी से सीधी मांग: आर-पार के मूड में जनता और माले

समस्तीपुर की इस नारकीय स्थिति और प्रशासनिक विफलता को देखते हुए भाकपा माले ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जिलाधिकारी से बेहद कड़े शब्दों में मांग की है कि वे इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी को तुरंत एक उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन करना चाहिए, जो पिछले 2 वर्षों में नाला निर्माण, सफाई, मरम्मत और रिपेयरिंग के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों-करोड़ रुपये की विस्तृत फॉरेंसिक और तकनीकी जांच करे।

इस जांच के दायरे में उन सभी दोषी ठेकेदारों, कनीय अभियंताओं (जेई) और संबंधित नगर निगम अधिकारियों को लाया जाए जिन्होंने जनता के पैसे की खुली लूट की है। उनके खिलाफ वित्तीय गबन और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज कर उन्हें अविलंब जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए और उनकी निजी संपत्तियों को कुर्क करके इस सरकारी धन की वसूली की जानी चाहिए।

समस्तीपुर की त्रस्त जनता अब खोखले आश्वासनों और कागजी दावों से पूरी तरह थक चुकी है। नियमित रूप से भारी-भरकम टैक्स चुकाने के बावजूद यदि उन्हें नरक में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है, तो यह लोकतंत्र का सबसे भद्दा मजाक है। भाकपा माले ने चेतावनी दी है कि यदि जिलाधिकारी ने इस लूट तंत्र पर लगाम नहीं लगाई और आगामी 1 सप्ताह के भीतर विवेक-विहार सहित सभी प्रभावित मोहल्लों से जल निकासी और नालों की वास्तविक सफाई सुनिश्चित नहीं की, तो पार्टी आम जनता को लामबंद कर नगर निगम मुख्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव करेगी। इस उग्र जन-आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की विधि-व्यवस्था की समस्या के लिए पूरी तरह से नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस अंतिम चेतावनी के बाद अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है या समस्तीपुर को ऐसे ही भ्रष्टाचार के दलदल में डूबने के लिए छोड़ देता है।

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करोड़ों की घूस, नकली दस्तावेज और सरकारी गबन: बिहार में एसवीयू का बड़ा एक्शन, आईएएस संजीव हंस की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी!

लेडी डॉन रिशुश्री का खुला राज: 3.5% कमीशन वाले इंजीनियर साहब समेत 3 अधिकारी सलाखों के पीछे

बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी फैल चुकी हैं, इसका अंदाजा विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की इस ताजा और सबसे बड़ी कार्रवाई से लगाया जा सकता है। सचिवालय से लेकर तकनीकी विभागों तक फैले एक हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसे पर्दे के पीछे से ‘लेडी डॉन’ की तरह ऑपरेट कर रही थी रिलायबल इन्फ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की ओनर रिशुश्री।

रिशुश्री, जो विनोद कुमार सिन्हा की पुत्री है और पटना के मीठापुर, खगौल रोड स्थित कामता राम सखी एन्क्लेव के फ्लैट नंबर 5A से अपना पूरा साम्राज्य चला रही थी, उसने बिहार ब्यूरोक्रेसी के सबसे रसूखदार चेहरों को अपने जाल में फंसा रखा था। एसवीयू की जांच और मुख्य अभियुक्त रिशुश्री के इकबालिया बयान ने शासन के गलियारों में खलबली मचा दी है।

इस सिंडिकेट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सच भवन निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता तारणी दास के रूप में सामने आया है। जांच में यह साबित हुआ है कि सरकारी फाइलों और करोड़ों रुपये के बिलों को पास करने के लिए तारणी दास सीधे 3.5% का नगद कमीशन वसूलते थे। यह कोई छोटा-मोटा लेन-देन नहीं था, बल्कि रिशुश्री और तारणी दास के बीच का यह फिक्स डील था, जिसने सरकार के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर बजट को खोखला कर दिया। इस काली कमाई के बूते तारणी दास के साथ-साथ वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु कुमार चौधरी और बुडको के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह आज सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं।

नोटों के पहाड़ पर सो रहे थे बिहार के ये 3 बड़े अधिकारी

जब कानून का डंडा चला और केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के साथ-साथ एसवीयू ने इन अधिकारियों के आलीशान ठिकानों के कमरों और तिजोरियों को खंगाला, तो वहां का नजारा देखकर जांच अधिकारी भी दंग रह गए। ये अधिकारी जनता की गाढ़ी कमाई को लूटकर सचमुच नोटों के पहाड़ पर सो रहे थे।

इन भ्रष्ट अधिकारियों के घरों से बरामद हुए अकूत कैश का ब्योरा इस प्रकार है:

अधिकारी का नाम और पदसंबंधित विभागबरामद नगद राशि (कैश)भ्रष्टाचार का तरीका / कमीशन
तारणी दास

(सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता)
भवन निर्माण विभाग8.5 करोड़ रुपयेसरकारी विपत्रों (बिलों) को पास कराने के एवज में 3.5% नगद कमीशन।
मुमुक्षु कुमार चौधरी

(तत्कालीन संयुक्त सचिव)
वित्त विभाग (पूर्व नगर आयुक्त, सीतामढ़ी/सहरसा)2.0 करोड़ रुपयेशहरी विकास परियोजनाओं के टेंडर अवैध रूप से रिशुश्री की कंपनियों को दिलाना।
उमेश कुमार सिंह

(कार्यपालक अभियंता)
बुडको (नगर विकास एवं आवास विभाग)1.0 करोड़ रुपयेड्रेनेज पंपिंग स्टेशन वर्क और अन्य निविदाओं में 1% का फिक्स नगद कमीशन।

कुल बरामदगी: केवल इन तीन अधिकारियों के ठिकानों से 11.5 करोड़ रुपये की नगद राशि बरामद की जा

चुकी है। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बिहार में टेंडर जारी करने से लेकर बजट आवंटन तक का खेल पूरी तरह फिक्स था और फाइलों की रफ्तार नोटों की गड्डियों से तय होती थी।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

सचिवालय से लेकर नगर निगम तक फैला था भ्रष्टाचार का जाल

एसवीयू के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार दाराद द्वारा जारी आधिकारिक ब्योरे के अनुसार, यह पूरा मामला केवल कुछ करोड़ रुपये की रिश्वत का नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राजकीय गोपनीयता से खिलवाड़ और संगठित सरकारी डकैती का है।

इस सिंडिकेट का नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से काम करता था:

  • मुमुक्षु कुमार चौधरी का खेल: मुमुक्षु कुमार चौधरी जब सीतामढ़ी में जिला विकास अभिकरण (डीआरडीए) के निदेशक थे, तब उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सीतामढ़ी के नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार हासिल किया। इसके बाद वे सहरसा नगर निगम में भी नगर आयुक्त के पद पर तैनात रहे। इस दौरान उन्होंने रिशुश्री के साथ मिलकर नगर विकास और शहरी विकास परियोजनाओं के गुप्त टेंडर पेपर्स को पहले ही लीक कर दिया और रिशुश्री की कंपनियों के पक्ष में टेंडर फाइनल करवाए। इसके बदले उन्हें 2 करोड़ रुपये कैश दिए गए। वर्तमान में वे वित्त विभाग में संयुक्त सचिव जैसे अत्यंत संवेदनशील पद पर बैठकर इस पूरे खेल को वित्तीय संरक्षण दे रहे थे।
  • उमेश कुमार सिंह की भूमिका: बुडको (बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम) के कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात रहते हुए उमेश कुमार सिंह ने पटना और आसपास के क्षेत्रों में ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया। रिशुश्री को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को बदला गया और 1% कमीशन के लालच में सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई गई। उनके घर से बरामद 1 करोड़ रुपये इसी कमीशनखोरी का हिस्सा हैं।

शासकीय गुप्तता अधिनियम और बीएनएस की गंभीर धाराएं: कानून का शिकंजा

यह मामला कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एसवीयू ने इन आरोपियों के खिलाफ साधारण भ्रष्टाचार की धाराओं के साथ-साथ देश की सुरक्षा और प्रशासनिक गोपनीयता को भंग करने वाली धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

एसवीयू थाना कांड संख्या 05/2025 दिनांक 30.04.2025 के तहत दर्ज इस मामले में निम्नलिखित कड़ी धाराएं लगाई गई हैं:

  1. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018): इसकी धारा 7A, 8, 9, 10 और 12 के तहत लोक सेवकों द्वारा अवैध परितोषिक (रिश्वत) लेने और निजी व्यक्तियों द्वारा उन्हें प्रभावित करने का अपराध।
  2. शासकीय गुप्तता अधिनियम 1923 (ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट): इसकी धारा 3(2), 6(2) और 15 के तहत सरकारी टेंडरों और गोपनीय दस्तावेजों को निजी कंपनियों को सौंपने का संगीन आरोप।
  3. भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस): इसकी धारा 61 (आपराधिक साजिश), 318(4) (जालसाजी और धोखाधड़ी), 338 (फर्जी दस्तावेज बनाना) और 340(2) (फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जांच में यह पूरी तरह पुख्ता हो चुका है कि इन अधिकारियों ने लोक सेवक (पब्लिक सर्वेंट) होने के गौरव को ताक पर रखकर, आपराधिक षड्यंत्र के तहत सरकारी टेंडरों को हैक और फिक्स किया। इसके लिए बकायदा नकली दस्तावेज (फोर्ज्ड डॉक्यूमेंट्स) तैयार किए गए और सरकारी फाइलों में बड़े पैमाने पर हेरफेर (मैनिपुलेशन) की गई।

फरार आईएएस संजीव हंस: रसूखदार नाम पर एसवीयू का कसता फंदा

इस पूरे महाघोटाले और सिंडिकेट की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई यह है कि इसका मुख्य सरगना और प्राथमिक अभियुक्त कोई और नहीं, बल्कि बिहार के बेहद रसूखदार आईएएस अधिकारी संजीव हंस हैं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि इस पूरे नेटवर्क को संजीव हंस का सीधा संरक्षण प्राप्त था।

10.06.2026 की सुबह का घटनाक्रम: तड़के सुबह पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के नेतृत्व में एसवीयू की 4 विशेष टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने एक साथ पटना स्थित आईएएस संजीव हंस के सरकारी और निजी आवास, कार्यालय तथा अन्य तीनों अधिकारियों के ठिकानों पर एक साथ धावा बोला। योजना बेहद गोपनीय थी, लेकिन छापेमारी की भनक लगते ही आईएएस संजीव हंस अपने आवास से फरार होने में सफल रहे।

एसवीयू के सूत्रों के अनुसार, संजीव हंस के ठिकानों से कई ऐसे डिजिटल दस्तावेज, व्हाट्सएप चैट और बेनामी संपत्तियों के कागजात हाथ लगे हैं, जो सीधे तौर पर इस टेंडर घोटाले में उनकी संलिप्तता को उजागर करते हैं। वर्तमान में वे अंडरग्राउंड हैं, और पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में बिहार से लेकर दिल्ली तक ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। एसवीयू ने साफ कर दिया है कि संजीव हंस की गिरफ्तारी के बिना इस जांच का दायरा पूरा नहीं होगा और जल्द ही उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान

इस पूरे प्रकरण ने बिहार की प्रशासनिक शुचिता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। जब वित्त विभाग का संयुक्त सचिव, बुडको का कार्यपालक अभियंता, और भवन निर्माण विभाग का मुख्य अभियंता एक निजी कंपनी की महिला ओनर के साथ मिलकर सरकार की नीतियों और पैसों की नीलामी करने लगें, तो विकास योजनाओं की गुणवत्ता का भगवान ही मालिक है।

रिशुश्री के जरिए जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग और बीएमएसआईसीएल जैसे मलाईदार विभागों में टेंडर का जो खेल खेला गया, उसने यह साबित कर दिया है कि नीचे से लेकर ऊपर तक एक सुनियोजित सिंडिकेट काम कर रहा था। फिलहाल, तारणी दास, मुमुक्षु कुमार चौधरी और उमेश कुमार सिंह जेल की सलाखों के पीछे अपने पापों का हिसाब दे रहे हैं, जबकि एसवीयू आईएएस संजीव हंस को दबोचने के लिए जाल बिछा चुकी है। जांच एजेंसी का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े सफेदपोश चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

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घूसखोर मुखिया का ‘गेम ओवर’: दलसिंहसराय में 1,20,000 की घूस लेते निगरानी के जाल में फंसे सियाराम राय!

पटना/समस्तीपुर: बिहार में पंचायत स्तर पर जारी भ्रष्टाचार के मकड़जाल पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। राज्य में सुशासन के दावों के बीच सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक अधिकारों को अपनी जागीर समझने वाले सफेदपोशों के खिलाफ निगरानी विभाग ने एक ही दिन में दो-दो बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की हैं। इस महा-अभियान की सबसे बड़ी और धमाकेदार कामयाबी समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय में मिली, जहां भ्रष्टाचार की सभी सीमाएं लांघ चुके एक निरंकुश मुखिया को 1,20,000 रुपये की भारी-भरकम घूस समेटते हुए रंगे हाथों दबोच लिया गया। वहीं, दूसरी समानांतर कार्रवाई में गया जिले से कानून की धज्जियां उड़ाने वाले एक चौकीदार को भी रिश्वत लेते पकड़ा गया है। इन दोनों कार्रवाइयों ने पूरे सूबे के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

दलसिंहसराय में बिछा निगरानी का जाल: ऐसे हुआ मुखिया का शिकार

समस्तीपुर जिले का दलसिंहसराय इलाका 10 जून 2026 को एक अभूतपूर्व पुलिसिया कार्रवाई का गवाह बना। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने एक बेहद गोपनीय और सटीक रणनीति के तहत ग्राम पंचायत राज चकबहाउद्दीन के मुखिया सियाराम राय को 1,20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस बड़ी घूसखोरी के पीछे की कहानी बेहद चौंकाने वाली है, जो यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर जनप्रतिनिधि किस कदर आम जनता का खून चूस रहे हैं।

कानून के शिकंजे में घूसखोर: (बाएं) गया के बेलागंज में काउंटर केस से नाम हटाने के नाम पर 9,000 रुपये ऐंठते गिरफ्तार हुआ चौकीदार मनीष कुमार और (दाएं) समस्तीपुर के दलसिंहसराय में निलंबन मुक्ति के नाम पर 1,20,000 रुपये की भारी घूस लेते रंगे हाथों दबोचा गया चकbahauddin पंचायत का मुखिया सियाराम राय निगरानी ब्यूरो की कस्टडी में।

निलंबन मुक्ति के नाम पर मांगी गई थी मोटी रकम

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब चकबहाउद्दीन के रहने वाले परिवादी अब्दुल मन्नान (पिता: मो० अजीम) ने भ्रष्टाचार के इस खेल के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। आरोपी मुखिया सियाराम राय के पास न केवल मुखिया का पद था, बल्कि वह पंचायत सचिव के प्रभार में भी काम कर रहा था। इसी दोहरी ताकत का नाजायज फायदा उठाते हुए उसने अब्दुल मन्नान को एक विभागीय निलंबन से मुक्त करने के एवज में 1,20,000 (एक लाख बीस हजार) रुपये की मोटी रकम बतौर रिश्वत मांगी थी। पीड़ित ने इस अन्याय के सामने झुकने के बजाय पटना स्थित निगरानी ब्यूरो के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करा दी।

कॉस्मेटिक दुकान में जाल बिछाकर दबोचा गया आरोपी

शिकायत दर्ज होने के बाद निगरानी ब्यूरो हरकत में आया। ब्यूरो ने 09 जून 2026 को गोपनीय तरीके से मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान यह बात पूरी तरह सच साबित हुई कि मुखिया द्वारा घूस की मांग की जा रही है। इसके तुरंत बाद निगरानी ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक अमरेन्द्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में एक बेहद चुस्त धावा दल का गठन किया गया।

10 जून 2026 को जैसे ही मुखिया सियाराम राय रिश्वत की रकम लेने के लिए दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के गुदरीपुल के पास स्थित अब्दुल मन्नान की श्रृंगार (कॉस्मेटिक) दुकान पर पहुंचा, पहले से घात लगाकर बैठे निगरानी के जवानों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। मुखिया को संभलने तक का मौका नहीं मिला और 1,20,000 रुपये के चमचमाते नोटों के साथ उसे रंगे हाथों दबोच लिया गया। इस सनसनीखेज गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम आरोपी को अपने साथ मुजफ्फरपुर ले गई, जहां पूछताछ के बाद उसे निगरानी के माननीय विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा।

पंचायत स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक पावर का जानलेवा गठजोड़

दलसिंहसराय की यह घटना सिर्फ एक मुखिया की गिरफ्तारी का मामला नहीं है, बल्कि यह बिहार की त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में गहरे धंसे भ्रष्टाचार का एक जीवंत एक्सरे है। इस मामले में सबसे गौर करने वाली बात यह है कि आरोपी सियाराम राय मुखिया होने के साथ-साथ पंचायत सचिव के प्रशासनिक प्रभार में भी था।

सत्ता का केंद्रीकरण और भ्रष्टाचार की वजह: जब किसी एक ही व्यक्ति को राजनीतिक रसूख (मुखिया) और प्रशासनिक शक्ति (पंचायत सचिव) दोनों सौंप दी जाती हैं, तो वहां जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो जाती है। ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति खुद को कानून से ऊपर समझने लगता है। निलंबन मुक्त करने जैसी फाइलों को अटकाकर आम लोगों से लाखों रुपये की उगाही करना यह साबित करता है कि विकास के लिए आने वाला पैसा और प्रशासनिक अधिकार किस तरह आम जनता के दमन का जरिया बन चुके हैं।

निगरानी विभाग की इस त्वरित कार्रवाई ने आम जनता में यह विश्वास जगाया है कि यदि वे बिना डरे शिकायत करें, तो बड़े से बड़े रसूखदार का भी ‘गेम ओवर’ होना तय है।

दूसरा प्रहार: गया के बेलागंज में 9,000 लेते चौकीदार गिरफ्तार

निगरानी ब्यूरो का दूसरा कड़ा ऐक्शन गया जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र में देखने को मिला। जहां पनारी पंचायत के एक भ्रष्ट चौकीदार मनीष कुमार को 9,000 (नौ हजार) रुपये की घूस लेते हुए बेलागंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर से रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

मामला: पुलिस केस से नाम हटाने की एवज में रिश्वत

आरोपी: मनीष कुमार (चौकीदार,पनारी पंचायत)

रिश्वत राशि: 9,000 रुपये

शिकायतकर्ता: रविन्द्र यादव

गिरफ्तारी स्थल: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर, बेलागंज

काउंटर केस से बच्चों का नाम हटाने का सौदा

इस मामले के परिवादी रविन्द्र यादव (पिता: स्वर्गीय जायुन यादव, निवासी: पनारी, बेलागंज) थे। रविन्द्र यादव के परिवार और उनके पड़ोसियों के बीच किसी विवाद को लेकर बेलागंज थाने में एक काउंटर केस (कांड संख्या 689/23) दर्ज था। इस केस में रविन्द्र यादव के निर्दोष बच्चों का नाम भी घसीट लिया गया था। इसी बात का फायदा उठाते हुए चौकीदार मनीष कुमार ने केस से बच्चों का नाम हटवाने और मामले को रफा-दफा करने के नाम पर रिश्वत की मांग की थी।

निगरानी ब्यूरो ने इस शिकायत का भी बारीकी से सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने पर पुलिस उपाधीक्षक समीर चन्द्र झा के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल ने बेलागंज स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जाल बिछाया। जैसे ही चौकीदार मनीष कुमार ने रिश्वत के 9,000 रुपये अपने हाथ में लिए, निगरानी की टीम ने उसे दबोच लिया। आरोपी चौकीदार को कागजी कार्रवाई और पूछताछ के बाद पटना स्थित निगरानी विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा।

ग्रामीण पुलिसिंग और रसूख का खौफ

गया की घटना इस बात का प्रमाण है कि भ्रष्टाचार की जड़ें केवल ऊंचे पदों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि चौकीदार जैसे निचले स्तर के कर्मचारी भी ग्रामीणों को कानूनी पचड़ों और मुकदमों का डर दिखाकर अवैध वसूली कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में पुलिस केस (विशेषकर काउंटर केस) का खौफ इतना ज्यादा होता है कि लोग अपनी इज्जत और बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए इन छोटे कर्मचारियों की नाजायज मांगों के आगे झुकने को मजबूर हो जाते हैं। चौकीदार मनीष कुमार की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि कानून की आड़ में जनता को डराने वाले किसी भी मोहरे को बख्शा नहीं जाएगा।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का रिपोर्ट कार्ड: आंकड़ों की जुबानी भ्रष्टाचार पर चोट

वर्ष 2026 में निगरानी ब्यूरो जिस आक्रामक अंदाज में काम कर रहा है, उसके आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं। ब्यूरो ने इस साल घूसखोरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है।

वर्ष 2026 बनाम वर्ष 2025 की तुलनात्मक तालिका:

पैमाना (पैरामीटर)वर्ष 2026 (10 जून तक)वर्ष 2025 (पूरा वर्ष)
कुल दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर)71
कुल ट्रैप कांड66101
रंगे हाथों गिरफ्तार अभियुक्त66
कुल बरामद रिश्वत राशि26,71,800 रुपये37,80,300 रुपये

इस आंकड़े का विश्लेषण करें तो साफ पता चलता है कि वर्ष 2026 के शुरुआती साढ़े पांच महीनों में ही निगरानी विभाग ने 66 घूसखोरों को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। यह रफ्तार पिछले साल के मुकाबले काफी तेज है, जो यह दर्शाती है कि या तो समाज में भ्रष्टाचार की शिकायत करने की हिम्मत बढ़ी है या फिर निगरानी का सूचना तंत्र बेहद मजबूत हो चुका है।

निगरानी ब्यूरो की जनता से अपील: डरें नहीं, घूसखोरों को बेनकाब करें

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना ने इस बड़ी कामयाबी के बाद एक बार फिर राज्य की आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी लोक सेवक (सरकारी पदाधिकारी या कर्मचारी) किसी भी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो उसके सामने घुटने टेकने की जरूरत नहीं है। जनता समय रहते ब्यूरो के निम्नलिखित आधिकारिक माध्यमों पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है:

  • लैंडलाइन नंबर्स: 0612-2215030, 0612-2215032, 0612-2215033, 0612-2215036, 0612-2215037, 0612-2999752
  • हेल्पलाइन नंबर: 0612-2215344
  • मोबाइल नंबर: 7765953261
  • व्हाट्सएप नंबर: 9473494167
  • ईमेल आईडी: spvig-bih@nic.in
  • पता: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो बिहार, पटना, 6 सर्कुलर रोड, पटना।

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बिहार में नए डिग्री कॉलेजों को चालू करने की युद्धस्तर पर तैयारी, 39 प्राध्यापकों को मिली बर्शर की कमान!

मुजफ्फरपुर: बिहार के उच्च शिक्षा विभाग के कड़े रुख और नीतिगत फैसलों के बाद बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी ने राज्य में नवस्थापित गवर्नमेंट डिग्री कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है । यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से विभिन्न कॉलेजों और विभागों के 39 शिक्षकों को नए डिग्री कॉलेजों में प्रतिनियुक्त कर दिया है । खास बात यह है कि इन सभी प्राध्यापकों को उनके शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ संबंधित कॉलेजों के बर्शर (आय-व्यय और वित्तीय अनुशासन अधिकारी) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है ।

वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक मजबूती पर जोर

यूनिवर्सिटी द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह फैसला उच्च शिक्षा विभाग, बिहार सरकार के सचिव द्वारा जारी संकल्पों और निर्देशों के आलोक में लिया गया है । यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और नए नियुक्त प्रभारी प्राचार्यों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद वाइस-चांसलर ने इस प्रतिनियुक्ति को मंजूरी दी । इस कदम का मुख्य उद्देश्य नए सत्र 2026-30 से शैक्षणिक गतिविधियों को बिना किसी बाधा के शुरू करना, प्रशासनिक कामकाज को गति देना और कॉलेजों में कड़ा वित्तीय अनुशासन बनाए रखना है ।

तुरंत योगदान देने का आदेश

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रोफेसर समीर कुमार शर्मा के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में साफ कहा गया है कि प्रतिनियुक्त किए गए सभी शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त (रिलीव) माना जाएगा । इन सभी को बिना किसी देरी के अपने नए तैनाती वाले स्थान पर योगदान देना होगा ताकि कॉलेजों का कामकाज सुचारू रूप से आगे बढ़ सके । इसकी प्रतिलिपि बिहार सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा निदेशक और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (यूजीसी) के सचिव को भी सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है ।

नवस्थापित गवर्नमेंट डिग्री कॉलेजों में तैनात बर्शर (प्राध्यापकों) की पूरी सूची:

नीचे दी गई तालिका में प्रतिनियुक्त शिक्षकों का नाम (डॉक्टर उपाधि सहित), उनका मूल विभाग/कॉलेज और उनकी नई तैनाती का स्थान दिया गया है:

क्र. सं.शिक्षक का नाम और मूल विभाग/कॉलेजप्रतिनियुक्ति का स्थान (गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज)ब्लॉकजिला
Iडॉ. मनोहर कुमार श्रीवास्तव, हिंदी विभाग, एम.एस. कॉलेज, मोतिहारीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, संग्रामपुरसंग्रामपुरपूर्वी चंपारण
IIडॉ. पवन कुमार, राजनीति विज्ञान विभाग, एम.एस. कॉलेज, मोतिहारीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, बंजरियाबंजरियापूर्वी चंपारण
IIIडॉ. रितेश पासवान, हिंदी विभाग, आर.पी.एस. कॉलेज, चकेयाज, वैशालीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, मेहसीमेहसीपूर्वी चंपारण
IVडॉ. सरोज कुमार, अर्थशास्त्र विभाग, जीवेच कॉलेज, मोतीपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, औराईऔराईमुजफ्फरपुर
Vडॉ. विनोद कुमार आजाद, हिंदी विभाग, एस.आर.पी.एस. कॉलेज, जैतपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, सुगौलीसुगौलीपूर्वी चंपारण
VIडॉ. अनीता कुमारी, यूनिवर्सिटी अर्थशास्त्र विभाग, बी.आर.ए.बी.यू. मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, तुरकौलियातुरकौलियापूर्वी चंपारण
VIIडॉ. वलीउर रहमान, अंग्रेजी विभाग, के.सी.टी.सी. कॉलेज, रक्सौलराजकीय डिग्री महाविद्यालय, तेतरियातेतरियापूर्वी चंपारण
VIIIडॉ. मो. एजाज अनवर, अर्थशास्त्र विभाग, एल.एन.टी. कॉलेज, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, नानपुरनानपुरसीतामढ़ी
IXडॉ. अर्धेन्दु, राजनीति विज्ञान विभाग, एल.एस. कॉलेज, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, गायघाटगायघाटमुजफ्फरपुर
Xडॉ. कमलेश कुमार, अर्थशास्त्र विभाग, राजकीय डिग्री महाविद्यालय, बगहाराजकीय डिग्री महाविद्यालय, रामगढ़वारामगढ़वापूर्वी चंपारण
XIडॉ. शशि कुमार पासवान, हिंदी विभाग, नीतिश्वर महाविद्यालय, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, आदापुरआदापुरपूर्वी चंपारण
XIIडॉ. प्रभाकर सिंह, इतिहास विभाग, एम.एस. कॉलेज, मोतिहारीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, छौड़ादानोछौड़ादानोपूर्वी चंपारण
XIIIकुमारी रंजना, हिंदी विभाग, एस.के.एस.डब्ल्यू. कॉलेज, मोतिहारीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, बनकटवाबनकटवापूर्वी चंपारण
XIVसंतोष विश्नोई, हिंदी विभाग, एल.एन.डी. कॉलेज, मोतिहारीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, पकड़ीदयालपकड़ीदयालपूर्वी चंपारण
XVडॉ. दशरथ राम, हिंदी विभाग, टी.पी. वर्मा कॉलेज, नरकटियागंजराजकीय डिग्री महाविद्यालय, चिरैयाचिरैयापूर्वी चंपारण
XVIडॉ. विकास मंडल, अर्थशास्त्र विभाग, टी.पी. वर्मा कॉलेज, नरकटियागंजराजकीय डिग्री महाविद्यालय, पताहीपताहीपूर्वी चंपारण
XVIIडॉ. सोनी कुमारी, राजनीति विज्ञान विभाग, आर.एल.एस.वाई. कॉलेज, बेतियाराजकीय डिग्री महाविद्यालय, योगापट्टीयोगापट्टीपश्चिम चंपारण
XVIIIडॉ. मंजूर हसन मलिक, अर्थशास्त्र विभाग, गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, मधुबन, पकड़ीदयालराजकीय डिग्री महाविद्यालय, डुमरी कटसरीडुमरी कटसरीशिवहर
XIXडॉ. आशा सिंह यादव, हिंदी विभाग, एम.डी.डी.एम. कॉलेज, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, बोचहांबोचहांमुजफ्फरपुर
XXडॉ. मो. उमर फारूक, अर्थशास्त्र विभाग, राजकीय डिग्री महाविद्यालय, शिवहरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, पिपराहीपिपराहीशिवहर
XXIडॉ. उपेंद्र प्रसाद, हिंदी विभाग, रामेश्वर महाविद्यालय, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, पुरनहियापुरनहियाशिवहर
XXIIडॉ. श्याम किशोर प्रसाद, हिंदी विभाग, आर.एन. कॉलेज, हाजीपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, बाजपट्टीबाजपट्टीसीतामढ़ी
XXIIIडॉ. अभिषेक रंजन, हिंदी विभाग, एम.एस.एम. समता कॉलेज, जंदाहाराजकीय डिग्री महाविद्यालय, बोखड़ाबोखड़ासीतामढ़ी
XXIVडॉ. सूरज कुमार, अर्थशास्त्र विभाग, आर.डी.एस. कॉलेज, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, चोरौतचोरौतसीतामढ़ी
XXVडॉ. राजीव कुमार, इतिहास विभाग, एल.एस. कॉलेज, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, मेजरगंजमेजरगंजसीतामढ़ी
XXVIडॉ. सचिदानंद मंडल, हिंदी विभाग, एम.एस.एस.जी. कॉलेज, अरेराज, मोतिहारीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, पिपराकोठीपिपराकोठीपूर्वी चंपारण
XXVIIडॉ. शारदानंद सहनी, अर्थशास्त्र विभाग, रामेश्वर महाविद्यालय, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, परसौनीपरसौनीसीतामढ़ी
XXVIIIडॉ. दिवाकर चौधरी, हिंदी विभाग, एस.आर.के.जी. कॉलेज, सीतामढ़ीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, रुन्नी सैदपुररुन्नी सैदपुरसीतामढ़ी
XXIXडॉ. प्रेम रंजन कुमार, इतिहास विभाग, रामेश्वर महाविद्यालय, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, सोनबरसासोनबरसासीतामढ़ी
XXXडॉ. शिवेंद्र कुमार मौर्य, हिंदी विभाग, एल.एस. कॉलेज, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, सुप्पीसुप्पीसीतामढ़ी
XXXIडॉ. पवन कुमार, इतिहास विभाग, आर.एन. कॉलेज, हाजीपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, पटेढ़ी बेलसरपटेढ़ी बेलसरवैशाली
XXXIIडॉ. मुकेश राम, अर्थशास्त्र विभाग, जे.एल.एन.एम. कॉलेज, घोड़ासहनराजकीय डिग्री महाविद्यालय, मझौलियामझौलियापश्चिम चंपारण
XXXIIIडॉ. अशोक कुमार निगम, इतिहास विभाग, आर.बी.बी.एम. कॉलेज, मुजफ्फरपुरराजकीय डिग्री महाविद्यालय, चनपटियाचनपटियापश्चिम चंपारण
XXXIVबलराम कुमार, हिंदी विभाग, आर.सी. कॉलेज, सकराराजकीय डिग्री महाविद्यालय, बैरियाबैरियापश्चिम चंपारण
XXXVडॉ. अजय कुमार, राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय डिग्री महाविद्यालय, बगहाराजकीय डिग्री महाविद्यालय, सिकटासिकटापश्चिम चंपारण
XXXVIडॉ. हारून रसूल, अर्थशास्त्र विभाग, जे.एस. कॉलेज, चंदौलीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, फेनहाराफेनहारापूर्वी चंपारण
XXXVIIडॉ. पंकज वासिनी, हिंदी विभाग, आर.एस.एस. महिला कॉलेज, सीतामढ़ीराजकीय डिग्री महाविद्यालय, ठकराहाठकराहापश्चिम चंपारण
XXXVIIIराजेश कुमार चंदेल, हिंदी विभाग, एम.जे.के. कॉलेज, बेतियाराजकीय डिग्री महाविद्यालय, पिपरासीपिपरासीपश्चिम चंपारण
XXXIXडॉ. संतोष आनंद, राजनीति विज्ञान विभाग, एस.आर.ए.पी. कॉलेज, बाराचकियाराजकीय डिग्री महाविद्यालय, भितहाभितहापश्चिम चंपारण

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बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: वीसी का बड़ा हंटर, टी के डे की छुट्टी, रजनीश गुप्ता और संगीता सिन्हा को मिली कमान!

मुजफ्फरपुर। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी), मुजफ्फरपुर में आज एक बहुत बड़ा प्रशासनिक उलटफेर देखने को मिला है । कुलपति (वाइस-चांसलर) के आदेश से विश्वविद्यालय प्रशासन ने अचानक से कई कड़े फैसले लिए हैं, जिससे पूरे कैंपस में हड़कंप मच गया है । एक तरफ जहाँ पुराने अधिकारी की छुट्टी कर दी गई है, वहीं दूसरी तरफ दो वरिष्ठ प्रोफेसरों को महत्वपूर्ण विभागों की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है ।

प्रशासनिक आधार पर गाज, टी के डे हटाए गए

विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, कुलपति ने मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और बेहद गंभीर विचार-विमर्श के बाद बड़ा कदम उठाया है । इसके तहत डॉक्टर टी के डे को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है । डॉक्टर टी के डे के पास अब तक दो बेहद महत्वपूर्ण प्रभार थे—वे ‘कोऑर्डिनेटर यूएमआईएस’ (यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) और ‘सीसीडीसी’ (कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल) के रूप में कार्य कर रहे थे । उन्हें प्रशासनिक आधार पर इन दोनों ही जिम्मेदारियों से पूरी तरह से हटा दिया गया है । इसके साथ ही कुलपति ने निर्देश दिया है कि टी के डे अब पूरी तरह से एल एस कॉलेज, मुजफ्फरपुर में अपनी केवल शैक्षणिक जिम्मेदारियों (पढ़ाने के कार्य) का निर्वहन करेंगे ।

प्रशासनिक फेरबदल का आधिकारिक फरमान: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) के आधिकारिक हस्ताक्षर वाला वह आदेश पत्र, जिसके जरिए कुलपति की अनुमति से विश्वविद्यालय में तीन बड़े फेरबदल किए गए हैं ।

प्रोफेसर रजनीश गुप्ता बने नए सीसीडीसी

डॉक्टर टी के डे को हटाए जाने के तुरंत बाद कुलपति ने खाली हुए पदों को भरने के लिए नए आदेश जारी किए हैं । विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग (साइकोलॉजी डिपार्टमेंट) के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रजनीश गुप्ता को नया ‘सीसीडीसी’ नियुक्त किया गया है । आदेश के मुताबिक, रजनीश गुप्ता अपने विभाग के शैक्षणिक कार्यों को संभालने के साथ-साथ अगले आदेश तक ‘सीसीडीसी’ के कर्तव्यों और कार्यों का पालन करेंगे ।

प्रोफेसर संगीता सिन्हा को कोऑर्डिनेटर यूएमआईएस का प्रभार

इसके अतिरिक्त, ‘यूएमआईएस’ के सुचारू संचालन के लिए कुलपति ने भौतिकी विभाग (फिजिक्स डिपार्टमेंट) की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संगीता सिन्हा पर भरोसा जताया है । संगीता सिन्हा को नया ‘कोऑर्डिनेटर यूएमआईएस’ अधिकृत किया गया है । वे भी अपनी वर्तमान शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक प्रभाग का काम तत्काल प्रभाव से संभालेंगी ।

कुलसचिव के हस्ताक्षर से आदेश जारी : ये सभी बड़े बदलाव और आदेश कुलसचिव (रजिस्ट्रार) के हस्ताक्षर से जारी किए गए हैं । इन प्रशासनिक ज्ञापनों (मेमो नंबर) की प्रतिलिपियां उच्च शिक्षा विभाग, बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव, सचिव, निदेशक समेत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव और सभी संबंधित अधिकारियों को सूचना तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं । विश्वविद्यालय गलियारे में इस अचानक हुए बदलाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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महाशक्ति भारत के महानायक: 4399 दिनों के अखंड राज से नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास, तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड!

लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बन दुनिया को झुकाया, कैबिनेट ने खड़े होकर बजाईं तालियां;

नितिन नवीन बोले- “25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकाला, अब भारत बनेगा विश्वगुरु”

ब्यूरो, नई दिल्ली :  भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने देश के शासन और विकास की दिशा को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। 4399 दिनों की यह निरंतर सेवा, दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णायक नीतिगत फैसलों का प्रमाण है। लगातार तीसरी बार देश की कमान संभालने वाले नरेंद्र मोदी ने न केवल भारत को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि वैश्विक मंच पर देश की प्रतिष्ठा को उस ऊँचाई पर पहुँचाया है जहाँ आज पूरी दुनिया भारत का लोहा मान रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब पूरी कैबिनेट ने खड़े होकर (स्टैंडिंग ओवेशन) तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अपने नेता का अभिनंदन किया।

तस्‍वीर में बदलाव के 4399 दिन! विकास के अचूक आंकड़ों के साथ नया भारत। जनधन खातों से लेकर आयुष्मान कार्ड, एक्सप्रेसवे और पर कैपिटा जीडीपी (प्रति व्यक्ति आय) में हुई रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि नरेंद्र मोदी के ट्रांसफॉर्मेटिव लीडरशिप (परिवर्तनकारी नेतृत्व) की कहानी बयां कर रही है।

140 करोड़ जनता का अटूट विश्वास, विकास की आंधी में उड़े विरोधी

भारतीय जनता पार्टी के नेता नितिन नवीन ने इस ऐतिहासिक क्षण पर हुंकार भरते हुए कहा कि आज नरेंद्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व ने एक नया इतिहास लिख दिया है। देश की 140 करोड़ जनता का जो आशीर्वाद, स्नेह और विश्वास उन्हें मिला है, यह उसी की ताकत और ऊर्जा है जिसके बल पर पूरी दुनिया में भारत का स्थान सर्वोच्च हुआ है। नितिन नवीन ने बड़े आंकड़े उजागर करते हुए कहा कि पिछले 12 सालों में जो कीर्तिमान बने हैं, उनमें सबसे बड़ा कीर्तिमान यह है कि आज 25 करोड़ परिवार गरीबी रेखा से बाहर आ चुके हैं। समाज के हर वर्ग, चाहे वह किसान हो, मज़दूर हो या रेहड़ी-पटरी वाला, नरेंद्र मोदी ने सबकी चिंता की है। यह दिन हर भारतवासी के लिए गर्व का दिन है। पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता उन्हें अपने आदर्श के रूप में देखता है।

ऐतिहासिक स्टैंडिंग ओवेशन! देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों ने खड़े होकर और तालियां बजाकर उनका भव्य अभिनंदन किया।

केंद्रीय कैबिनेट ने जताया आभार: 2047 तक विकसित भारतका संकल्प

ऐतिहासिक उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विशेष प्रस्ताव पारित कर नरेंद्र मोदी को बधाई दी। कैबिनेट ने गरीब कल्याण और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री की नीतियों की सराहना की। प्रस्ताव में कहा गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने और भारत के हितों की रक्षा करने में नरेंद्र मोदी का कोई सानी नहीं है। कैबिनेट ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समृद्ध और गौरवशाली राष्ट्र के रूप में नई ऊंचाइयों को छुएगा और साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का मार्ग पूरी तरह सशक्त होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संजय सरावगी ने कहा- “यह जनशक्ति की विजय है”

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि लगातार निर्वाचित होकर भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने का गौरव नरेंद्र मोदी को प्राप्त हुआ है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा दिया गया स्टैंडिंग ओवेशन उनके दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णायक नीतियों का सम्मान है। वहीं, संजय सरावगी ने पोस्ट करते हुए लिखा कि जनविश्वास से जनकल्याण तक की 4399 दिनों की यह यात्रा नए भारत की पहचान बन चुकी है। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य का आंदोलन है।

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मर्डर के 25 दिन बाद भी हत्यारे खुलेआम आजाद! खौल उठा जनता का खून, 22 जून को ताजपुर थाने की ईंट से ईंट बजायेंगे आक्रोशित ग्रामीण !

मोटरसाइकिल मिस्त्री संजीव सहनी हत्याकांड में पुलिसिया नाकामियों के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का भयंकर आक्रोश, भाकपा माले के नेतृत्व में होगा महा-घेराव

ताजपुर/समस्तीपुर, 10 जून 2026: मोटरसाइकिल मिस्त्री संजीव कुमार सहनी की नृशंस हत्या के पूरे 25 दिन बीत जाने के बाद भी हत्यारों को दबोचने में नाकाम रही पुलिस प्रशासन के खिलाफ पूरे इलाके में जबरदस्त उबाल आ गया है। अपराधियों की खुलेआम घूमती टोली और खाकी की निष्क्रियता से गुस्साए ग्रामीणों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। इसी भड़कती आग के बीच ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 27 स्थित मोतीपुर में बुधवार को मृतक के आवास पर आक्रोशित ग्रामीणों की एक आपात बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और सर्वसम्मति से यह महा-निर्णय लिया गया कि अगर अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो आगामी 22 जून को भाकपा माले के बैनर तले हजारों की संख्या में लोग ताजपुर थाना का घेराव कर ऐतिहासिक और उग्र आंदोलन करेंगे।

मृतक संजीव कुमार सहनी के मोतीपुर स्थित निवास पर न्याय की मांग को लेकर एकजुट हुए आक्रोशित ग्रामीणों एवं भाकपा माले नेताओं की बैठक, जहां सर्वसम्मति से 22 जून को ताजपुर थाना घेराव का आर-पार का फैसला लिया गया।

बैठक में उमड़े जनसैलाब और भाकपा माले के कद्दावर नेताओं ने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। वक्ताओं ने सीधे तौर पर कहा कि पुलिस की कथित सुस्ती और अपराधियों के साथ अंदरूनी सांठगांठ के कारण ही हत्यारे आज खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार को जान का खतरा बना हुआ है। आरोप है कि ताजपुर थाना क्षेत्र में इन दिनों अपराध का ग्राफ रॉकेट की रफ्तार से बढ़ा है। चाहे दिन-दहाड़े हुआ भीषण सोना चोरी कांड हो या फिर लगातार हो रही हत्या और लूट की वारदातें, पुलिस हर मोर्चे पर पूरी तरह फेल साबित हुई है। इस नाकामी का सीधा फायदा बेखौफ अपराधी उठा रहे हैं, जिससे आम जनता के बीच भारी दहशत और चिंता का माहौल व्याप्त है। स्थानीय नेताओं ने दहाड़ते हुए कहा कि पुलिस जानबूझकर संजीव कुमार सहनी हत्याकांड के मुख्य आरोपियों को बचाने का खेल खेल रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बयान:– “थानाध्यक्ष और पुलिस उपाधीक्षक ने 4 दिनों के अंदर हत्यारों की गिरफ्तारी का जो लिखित-मौखिक आश्वासन दिया था, वह आखिर खोखला क्यों साबित हुआ? पुलिस अपराधियों को संरक्षण देना बंद करे, वरना 22 जून को जनता खुद इंसाफ के लिए थाना घेरेगी।” — सुरेन्द्र प्रसाद सिंह (प्रखंड सचिव, भाकपा माले)

गैरेज में घुसकर बरसाई थीं ताबड़तोड़ गोलियां: गौरतलब है कि बीते 15 मई को ताजपुर के व्यस्त गांधी चौक के पास स्थित रमजान अली स्कूल के समीप मोटरसाइकिल सवार शातिर अपराधियों ने मोटरसाइकिल मिस्त्री संजीव कुमार सहनी पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। अपराधियों ने गैरेज के अंदर ही संजीव कुमार सहनी को गोलियों से छलनी कर दिया था, जिससे मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद मृतक के लाचार पिता देवकी सहनी ने न्याय की गुहार लगाते हुए ताजपुर थाना में कांड संख्या 98/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के तुरंत बाद जब जनता सड़कों पर उतरी थी, तब थानाध्यक्ष से लेकर पुलिस उपाधीक्षक तक ने रोष से भरी जनता को शांत करने के लिए 4 दिनों के भीतर हत्यारों को गिरफ्तार करने का बड़ा आश्वासन दिया था। लेकिन आज करीब 1 महीना बीतने को है, और नतीजा सिफर है। पुलिस के पास मृतक का मोबाइल और कई ठोस सुराग मौजूद होने के बावजूद जांच की सुई एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी है, जिससे पुलिसिया कार्यशैली पर गहरे सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

आंदोलनकारियों और पीड़ित परिवार की मुख्य मांगें:

  1. संजीव कुमार सहनी के हत्यारों की अविलंब और त्वरित गिरफ्तारी हो।
  2. पीड़ित और बेसहारा परिवार को प्रशासन की तरफ से उचित मुआवजा मिले।
  3. मृतक के परिवार के 1 सदस्य को तत्काल सरकारी नौकरी दी जाए।
  4. थाना क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और चोरी पर तुरंत लगाम लगे।

बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित रहे: भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रखंड कमिटी सदस्य ललन दास, जीतेंद्र कुमार सहनी, मृतक के पिता देवकी सहनी, मृतक की पत्नी रवीना देवी, मृतक का भाई सुशील सहनी, कुशी सहनी, सोनिया देवी, बबिता देवी, सुदामा देवी, राजकुमारी देवी, सरयुग कुमार, सीटू कुमार, रघुनाथ सहनी, चंदन सहनी समेत सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्रामीण।

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बिहार यूनिवर्सिटी में ‘ऑपरेशन वाइस-चांसलर’! एक झटके में बदले गए नए कॉलेजों के चेहरे, वित्तीय ताला-चाबी पर कड़ा पहरा

मुजफ्फरपुर: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी (बीआरएबीयू) से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है । चांसलर और वाइस-चांसलर के कड़े रुख के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों को जमीन पर उतारने के लिए ताबड़तोड़ तीन बड़े आदेश जारी कर दिए हैं । नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 को सुचारू रूप से शुरू करने और कॉलेज फंड में होने वाली हेराफेरी पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है ।

बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के संकल्प संख्या 15/पी/5-03/2026-633 और 19/पी/2/01/2026-872 के आलोक में वाइस-चांसलर ने दो नवनिर्मित राजकीय डिग्री कॉलेजों में तत्काल प्रभाव से प्रोफेसर-इन-चार्ज यानी प्राचार्यों की तैनाती कर दी है । यूनिवर्सिटी ने आदेश दिया है कि ये शिक्षक तुरंत योगदान देंगे ताकि नए सत्र की पढ़ाई में कोई बाधा न आए ।

  • पश्चिम चंपारण के पिपरासी स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में टीपी वर्मा कॉलेज, नरकटियागंज के पॉलिटिकल साइंस विभाग के चंद्र भूषण बैठा को कमान सौंपी गई है ।
  • पश्चिम चंपारण के ही भितहा स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में आरएलएसवाई कॉलेज, बेतिया के इकोनॉमिक्स विभाग के सुरेश कुमार को नया प्रोफेसर-इन-चार्ज बनाया गया है ।

भ्रष्टाचार पर चोट: 39 कॉलेजों में बर्सरतैनात, संभालेंगे तिजोरी

प्रशासनिक और वित्तीय अनुशासन को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए वाइस-चांसलर ने एक और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए 39 शिक्षकों को अलग-अलग कॉलेजों में बर्सर (अर्थपाल) के पद पर प्रतिनियुक्त कर दिया है । अब ये बर्सर कॉलेजों के वित्तीय कामकाज पर पैनी नजर रखेंगे ।

इनमें पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली और पश्चिम चंपारण के कॉलेज शामिल हैं । मुख्य रूप से मनोहर कुमार श्रीवास्तव (संग्रामपुर), पवन कुमार (बनकरिया), रितेश पासवान (मेहसी), सरोज कुमार (औरई), विनोद कुमार आजाद (सुगौली), अनीता कुमारी (तुरकौलिया), वलिउर रहमान (तेतरिया), मोहम्मद एजाज अनवर (नानपुर), अर्धेंदु (गायघाट), कमलेश कुमार (रामगढ़वा), शशि कुमार पासवान (अदापुर), प्रभाकर सिंह (छौड़ादानो) और कुमारी रंजना (बनकटवा) जैसे कई नामों को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा गया है । इसके अलावा राजेश कुमार चंदेल को पिपरासी और संतोष आनंद को भितहा का बर्सर बनाया गया है ।

एकतरफा चालाकी खत्म! अब ज्वॉइंट सिग्नेचर के बिना बैंक से नहीं निकलेगा एक भी रुपया

तीसरे और सबसे कड़े फैसले के तहत रजिस्ट्रार समीर कुमार शर्मा ने एक सख्त अधिसूचना जारी की है । अब नव-स्थापित राजकीय महाविद्यालयों के सभी बैंक खातों (सेविंग और करंट) का संचालन केवल प्राचार्य और बर्सर के संयुक्त हस्ताक्षर (ज्वॉइंट सिग्नेचर) से ही हो सकेगा । छात्र शुल्क, परीक्षा शुल्क, सरकारी या गैर-सरकारी अनुदान या दान से आने वाली हर एक पाई इसी संयुक्त खाते में जमा होगी । दोनों के हस्ताक्षर के बिना न तो कोई चेक जारी होगा, न ऑनलाइन ट्रांसफर और न ही कोई निकासी होगी ।

यूनिवर्सिटी ने अल्टीमेटम दिया है कि सभी कॉलेज 5 दिनों के भीतर बैंक की ये औपचारिकताएं पूरी कर रिपोर्ट दें और 30 दिनों के भीतर बैंक पासबुक, स्टेटमेंट और ज्वॉइंट मैंडेट की कॉपी कुलसचिव कार्यालय में जमा करें । नियमों की अनदेखी करने पर सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है ।

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रक्त की एक बूंद से बचेगी जिंदगी, सुजावलपुर में कल सजेगा ‘महादान’ का सबसे बड़ा मंच, उमड़ेगा युवाओं का सैलाब!

धड़कनों को थमने से रोकने के लिए सकरा (सुजावलपुर) मुजफ्फरपुर में महाअभियान, तैयारियों को लेकर युवाओं में भारी उत्साह।

सकरा (मुजफ्फरपुर): मानवता की सेवा और किसी की थमती हुई सांसों को नई जिंदगी देने के लिए ढोली मुजफ्फरपुर के सुजावलपुर में कल एक ऐतिहासिक महाअभियान की शुरुआत होने जा रही है। इलाके के सजग और जागरूक युवाओं द्वारा आयोजित यह मेगा ब्लड डोनेशन कैंप (रक्तदान शिविर) क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा और प्रभावी शिविर साबित होने वाला है। इस पूरे आयोजन को लेकर क्षेत्र के युवाओं और आम जनता में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

11 जून 2026 को ढोली मुजफ्फरपुर के सुजावलपुर में आयोजित होने वाले मेगा ब्लड डोनेशन कैंप (रक्तदान शिविर) को लेकर जारी किया गया विशेष पोस्टर, जिसमें भावेश भाई सोलंकी की स्मृति में केवल 1 दिन शेष (1 डे टू गो) रहने की घोषणा के साथ युवाओं से महादान में शामिल होने का आह्वान किया गया है।

कल सुबह 9 बजे से शुरू होगा महादान : प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विशाल रक्तदान शिविर 11 जून 2026 को सुबह 9:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे तक अनवरत चलेगा। आयोजन के लिए सुजावलपुर स्थित पप्पू सिनेमा हॉल के निकट मैक्स डायग्नोसिस सेंटर को मुख्य केंद्र बनाया गया है। शिविर की तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं और डॉक्टरों व चिकित्सा कर्मियों की विशेष टीम भी मुस्तैद रहेगी, ताकि रक्तदाताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

भावेश भाई सोलंकी की याद में समर्पित है यह शिविर यह पूरा आयोजन भावेश भाई सोलंकी की पावन स्मृति में किया जा रहा है। ‘इन मेमोरी ऑफ भावेश’ के संकल्प के साथ आयोजित इस मेगा ब्लड डोनेशन कैंप का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में रक्त की कमी से जूझ रहे मरीजों, थैलेसीमिया पीड़ितों और आपातकालीन स्थिति में फंसे लोगों तक समय पर मदद पहुंचाना है। आयोजकों का कहना है कि अगर आपके रक्त की कुछ बूंदें किसी के दिल की धड़कन बन सकती हैं, तो मानव जीवन में इससे बड़ा पुण्य और सौभाग्य का काम दूसरा कोई नहीं हो सकता।

आयोजन समिति ने की बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन के इरशाद आलम (मोबाइल नंबर: 9934073740) और मोबाइल केयर के विकास कुमार (मोबाइल नंबर: 9955100888) पूरी ताकत से जुटे हुए हैं। उन्होंने क्षेत्र के तमाम युवाओं, समाजसेवियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे कल 11 जून को मैक्स डायग्नोसिस सेंटर पहुंचकर इस महादान का हिस्सा बनें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। विस्तृत जानकारी या किसी भी प्रकार के सहयोग के लिए जारी किए गए मोबाइल नंबरों पर सीधे संपर्क किया जा सकता है।

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नोटबंदी पार्ट-3 की उड़ी अफवाह: 30 जून से कागज के नोट बंद होने का दावा पूरी तरह फर्जी, सरकार और आरबीआई ने खोला सच!

विशेष संवाददाता :  सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय मुद्रा (करेंसी) को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आगामी 30 जून 2026 से देश में चल रहे सभी कागजी नोटों को पूरी तरह से बंद (डिस्कंटीन्यू) करने जा रहा है। वीडियो में आगे दावा किया गया है कि इन कागजी नोटों की जगह अब बाजार में पूरी तरह से नए प्लास्टिक के नोट जारी किए जाएंगे। इस खबर के सामने आते ही आम जनता के बीच हड़कंप मच गया और लोग असमंजस की स्थिति में आ गए।

पीआईबी फैक्ट चेक ने किया भंडाफोड़, बताया पूरी तरह से फेक जब इस वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए भारत सरकार की आधिकारिक एजेंसी प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (पीआईबी) के ‘पीआईबी फैक्ट चेक’ विंग ने इसकी गहनता से जांच की, तो यह दावा पूरी तरह से झूठा और बेबुनियाद पाया गया। पीआईबी फैक्ट चेक ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा पूरी तरह से ‘फेक’ (फर्जी) है। डिजिटल रूप से छेड़छाड़ (डिजिटली आल्टरड) कर बनाए गए इस वीडियो का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।

सोशल मीडिया पर 30 जून से कागज के नोट बंद होने और प्लास्टिक नोट आने का जो दावा किया जा रहा है, उसे पीआईबी फैक्ट चेक ने पूरी तरह फर्जी (फेक) और डिजिटली एडिटेड करार दिया है।

आरबीआई की ऐसी कोई योजना नहीं: आधिकारिक बयान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, वर्तमान में कागजी मुद्रा नोटों को वापस लेने या उन्हें 30 जून 2026 तक प्लास्टिक के नोटों से बदलने की ऐसी कोई योजना नहीं है। देश की बैंकिंग प्रणाली और मुद्रा व्यवस्था पहले की तरह ही सुचारू रूप से काम करती रहेगी। आरबीआई ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की किसी भी भ्रामक और डराने वाली खबरों पर विश्वास न करें।

साझा करने से पहले करें पुष्टि, संदिग्ध खबरों की यहां करें रिपोर्ट सरकार ने जनता को सचेत करते हुए कहा है कि किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट को आगे शेयर या फॉरवर्ड करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि (वेरिफिकेशन) अवश्य कर लें। प्रामाणिक और सही जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक आरबीआई वेबसाइट आरबीआई डॉट ओआरजी डॉट इन (rbi.org.in) पर ही भरोसा करें। इसके अलावा, यदि आपको भारत सरकार या देश की व्यवस्था से जुड़ी कोई भी संदिग्ध सामग्री या संदेश मिलता है, तो उसे तुरंत पीआईबी फैक्ट चेक को रिपोर्ट करें ताकि सही समय पर अफवाहों पर लगाम लगाई जा सके।

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