Sunday, April 19, 2026

मुजफ्फरपुर में प्रशासनिक फेरबदल: मुरौल में जन-दबाव के आगे बैकफुट पर प्रशासन, क्‍या सकरा में शिफ्ट होगा ‘ग्राम कचहरी’ ?

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मुरौल में करोड़ों की सरकारी इमारतें बदहाल, नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय किराये के भवन में चलाने पर अड़ा,जवाब कौन देगा?

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर जिले के मुरौल और सकरा प्रखंडों में इन दिनों प्रशासनिक निर्णयों को लेकर हलचल तेज है। प्रशासन की ओर से पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए दो अलग-अलग कवायदें चल रही हैं—मुरौल में ‘पुलिस ओपी’ (OP) खोलने की कोशिश और सकरा बाजिद पंचायत में ‘एस.डी.पी.ओ. कार्यालय’ की स्थापना। न्यूज़ भारत टीवी की पड़ताल में जहाँ मुरौल में विरोध के बाद प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े हैं, वहीं सकरा में ग्राम कचहरी कार्यालय को बगल में शिफ्ट कर जगह खाली करवाई जा रही है।

तस्वीर: सकरा स्थित कार्यालय का दृश्य जहाँ पुलिस दफ्तर के लिए रंग रोगन की चल रही हैं तैयारियां


मुरौल: जन-विरोध के आगे प्रशासन का रुख बदला

मुरौल में ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन’ को पुलिस ओपी में तब्दील करने की प्रशासनिक योजना को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का तर्क था कि पंचायत सरकार भवन जन-सेवा के लिए है, न कि पुलिस चौकी के लिए। जनता की नाराजगी और विरोध को देखते हुए, प्रशासन अब मुरौल में ओपी के लिए ‘पंचायत सरकार भवन’ के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है।

सकरा: ग्राम कचहरी शिफ्ट, एस.डी.पी.ओ. कार्यालय की राह साफ

दूसरी ओर, सकरा प्रखंड के अंतर्गत ‘सकरा बाजिद पंचायत’ में स्थिति कुछ अलग है। यहाँ प्रशासन ने एस.डी.पी.ओ. कार्यालय खोलने के लिए पूरी तैयारी कर रही है। सरपंच कुंदन तिवारी ने पुष्टि की है कि एस.डी.पी.ओ. कार्यालय के लिए जगह बनाने हेतु ‘ग्राम कचहरी कार्यालय’ को बगल में ही शिफ्ट किया जा रहा है, ताकि प्रशासनिक कार्य बिना बाधा के शुरू हो सके।


अधिकारियों का पक्ष: क्या बोले ज़िम्मेदार?

न्यूज़ भारत टीवी ने जब प्रशासनिक अधिकारियों से इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा, तो उनके बयानों में दो अलग तरह की स्थितियां दिखीं।

1. सकरा थानाध्यक्ष का बयान: जब हमने उनसे मुरौल में ओपी खुलने की चर्चा और स्थल चयन के बारे में पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी कोई आधिकारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। थानाध्यक्ष ने कहा:

अभी मुरौल में थाना (ओपी) के लिए स्थल चिन्हित नहीं हुआ है। फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। संभवतः जब ऊपर से कोई आधिकारिक आदेश आएगा, तभी हम इस पर कोई ठोस कार्रवाई कर पाएंगे। फिलहाल स्थिति यथावत है।”

2. एस.डी.पी.ओ.-2 (पूर्वी) का बयान: एस.डी.पी.ओ. ने इस बात की पुष्टि की है कि कार्यालयों को लेकर योजनाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा:

मुरौल में जो ओपी खोलने की बात है, उसके लिए फिलहाल स्थल की तलाश की जा रही है। अभी दो-तीन जगह देखी गई है, अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर सब तय हो जाएगा। वहीं, जहाँ तक एस.डी.पी.ओ. कार्यालय की बात है, तो उसका स्थल सकरा में ही चिह्नित कर लिया गया है और उसे वहीं शिफ्ट किया जा रहा है।”

“सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन “वर्सेज  नगर पंचायत मुरौल कार्यालय

 खबर का एक अन्‍य कानूनी और नैतिक सवाल जनहित की अनदेखी और नगर पंचायत मुरौल की प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है –

इस पूरे मामले में केवल प्रशासनिक मनमानी ही नहीं, बल्कि सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने और जन-धन की बर्बादी के गंभीर प्रश्न भी खड़े हो रहे हैं। नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने नगर पंचायत मुरौल के  प्रशासनिक  कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है।

नगर पंचायत मुरौल  के कार्यालय संचालन और सरकारी नियमों की अनदेखी को लेकर वार्ड पार्षद आनंद कंद साह ने नगर विकास एवं आवास विभाग के स्पष्ट निर्देशों का हवाला देते हुए प्रशासन को घेरा है। पार्षद आनंद कंद साह ने नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना (पत्रांक 15/अभि०-10-01/2025-1284, दिनांक 03.04.2025) का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार, यदि किसी नवगठित नगर निकाय में ‘पंचायत सरकार भवन’ उपलब्ध है, तो कार्यालय को अनिवार्य रूप से उसी भवन में स्थानांतरित किया जाना चाहिए । पार्षद का तर्क है कि विभाग का यह स्पष्ट दिशानिर्देश राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया था, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग न हो । इसके बावजूद, अधिकारियों द्वारा राज्य सरकार के स्वामित्व वाले उपलब्ध बुनियादी ढांचे (पंचायत सरकार भवन) को छोड़कर निजी किराये के भवन में कार्यालय जारी रखना सरकारी नीतियों की खुली अवहेलना और ‘शक्ति का दुरुपयोग’ है । उन्‍होंने पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि “सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन, नगर पंचायत मुरौल  के कार्यालय के लिए एक आवश्‍यक एवं महत्‍वपूर्ण विकल्‍प है ।

आनंद कंद साह का कड़ा बयान:

“सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या 2 में स्थित है और यह हमारे नगर पंचायत के अधिकारिक पोषक क्षेत्र के अर्न्‍तगत है। नियम और सरकारी प्रावधानों के अनुसार, नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय इसी सरकारी भवन में संचालित होना चाहिए था। लेकिन विडंबना देखिए कि यहां जनता के टैक्स के पैसों की  बर्बाद हो  रहा है और नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय किराये के भवन में चलाया जा रहा है। क्या प्रशासन यह जवाब देगा कि खाली सरकारी भवन रहते हुए किराया पर भवन लिए जाने की क्या जरूरत  है?”

पार्षद आनंद कंद साह ने इसके कानूनी पहलुओं पर जोर देते हुए आगे कहा:

इतना ही नहीं, वर्तमान में जो कार्यालय किराये पर चल रहा है, वह किसी भी तरह से दिव्यांग-अनुकूल नहीं है। यह द राइट टू पर्सन विद डिसेबिलिटी एक्ट 2016′ का सीधा उल्लंघन है। हम लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकारी भवन में कार्यालय शिफ्ट किया जाए, जिससे जनता को भी सुविधा मिले और दिव्यांगजन भी आसानी से सरकारी लाभ ले सकें। प्रशासन नियमों को धता बताकर क्या साबित करना चाहता है?”

दानदाताओं की भावना का अपमान: इस मामले में सबसे ज्यादा आहत वे लोग हैं जिन्होंने लोक-कल्याण के लिए अपनी जमीन दी थी। स्वर्गीय सत्यनारायण प्रसाद के परिवार के सदस्यों ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है:

हमने यह जमीन सत्यनारायण पंचायत सरकार भवनके लिए दी थी, ताकि क्षेत्र के निवासियों को प्रशासनिक और जन-सुविधाएं मिल सकें। आज जब भवन खाली पड़ा है और प्रशासन इसे जन-सेवा के बजाय अन्य कार्यों में लाने की कोशिश कर रहा है, तो यह दानदाताओं की मूल मंशा के साथ-साथ लोक-कल्याणकारी भावना का भी घोर अपमान है। जमीन जिस प्रयोजन के लिए दी गई थी, उसे उसी उद्देश्य के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए, न कि प्रशासनिक मनमानी का केंद्र बनाकर।”


न्यूज़ भारत टीवी की विशेष टिप्पणी: “सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन “वर्सेज  नगर पंचायत मुरौल कार्यालय  के मामले में प्रशासन का यह रवैया न केवल सरकारी निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि यह क्षेत्र की जनता के हितों के साथ खिलवाड़ भी है। जब नगर पंचायत का अपना कार्यालय किराये पर चल रहा है, तो प्रशासन द्वारा सरकारी भवन को पुलिस दफ्तर बनाने की जिद कई सवालों को जन्म देती है। प्रशासन को जवाब देना होगा कि वह जनता के हित को सर्वोपरि रखेगा या अपनी मनमानी चलाएगा?

निगरानी के चक्रव्यूह में फंसे ‘भ्रष्टाचारी’: सालों से लुका-छिपी खेल रहे 13 आरोपियों ने कोर्ट में डाला हथियार!

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पटना/मुजफ्फरपुर/भागलपुर। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे महा-अभियान में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को बड़ी सफलता हाथ लगी है। ब्यूरो की ‘डेडलाइन’ और पुलिसिया दबिश के आगे नतमस्तक होकर, सालों से फरार चल रहे 13 शातिर अभियुक्तों ने खुद को कानून के हवाले कर दिया है। ये वो चेहरे हैं जिन्होंने सरकारी पदों पर रहते हुए न केवल भ्रष्टाचार किया, बल्कि वर्षों तक अदालती कार्यवाही से भी भागते रहे।

सालों पुराना हिसाब, अब होगा चुकता

इन अभियुक्तों में कोई 1997 से फरार था तो कोई 2010 से। निगरानी ब्यूरो ने फरवरी और मार्च 2026 में विशेष रणनीति के तहत इन पर शिकंजा कसा। ब्यूरो ने साफ चेतावनी दी थी कि “या तो मार्च अंत तक सरेंडर करो, वरना अप्रैल में वह कार्रवाई होगी जो नजीर बन जाएगी।” नतीजा यह हुआ कि पद का दुरुपयोग करने वाले 07 और रंगे हाथ रिश्वत (ट्रैप) में फंसे 06 आरोपियों ने चुपचाप कोर्ट में आत्मसमर्पण करना ही बेहतर समझा।

सरेंडर करने वाले अभियुक्तों की पूरी सूची (नाम और पदनाम):

क्र.सं.अभियुक्त का नाम व पतामामला/कांड संख्याअपराध की प्रकृति
1.बब्लू सिंह, पिता- रामेश्वर सिंह, बेगूसराय32/09पद का भ्रष्ट दुरुपयोग
2.राम अवतार राम, पिता- स्व. ग्रहण राम, रोहतास67/17पद का भ्रष्ट दुरुपयोग
3.हरेन्द्र राम, तत्कालीन क्षेत्रीय संगठन, छपरा22/97पद का भ्रष्ट दुरुपयोग
4.अमरेश झा अमर, पिता- कृष्णकांत झा, वैशाली03/10पद का भ्रष्ट दुरुपयोग
5.राज कुमार, पिता- स्व. रामनाथ प्रसाद, लखीसराय103/17ट्रैप (रंगे हाथ रिश्वत)
6.शारदा प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, नोनसर पैक्स, भागलपुर06/06ट्रैप (रंगे हाथ रिश्वत)
7.रविन्द्र प्रसाद, तत्कालीन थाना प्रभारी, समस्तीपुर74/09पद का भ्रष्ट दुरुपयोग
8.सुनील कुमार राय, मुजफ्फरपुर न्यायालय64/16ट्रैप (रंगे हाथ रिश्वत)
9.मनीष कुमार, मुजफ्फरपुर न्यायालय11/25ट्रैप (रंगे हाथ रिश्वत)
10.वीरेन्द्र प्रसाद मंडल, मुजफ्फरपुर न्यायालय17/99पद का भ्रष्ट दुरुपयोग
11.डॉ. विजय कुमार सिंह, सिविल सर्जन, जहानाबाद11/2020ट्रैप (रंगे हाथ रिश्वत)
12.रिंकू देवी उर्फ कृष्णावती देवी, पति- सनोज पासवान, रोहतास85/10पद का भ्रष्ट दुरुपयोग
13.प्रणव कुमार उर्फ कुमार प्रणव, पिता- स्व. मिथिलेश सिंह, मुजफ्फरपुर29/23ट्रैप (रंगे हाथ रिश्वत)

ब्यूरो की दोटूक: “अभी तो यह शुरुआत है”

निगरानी ब्यूरो के अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में ‘ट्रायल’ की प्रक्रिया अब और तेज होगी। फरार अभियुक्तों की संपत्ति कुर्क करने और उन पर चौतरफा दबाव बनाने की रणनीति तैयार है। इस सरेंडर के बाद अब विभाग इन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में सख्त पैरवी कर इन्हें सजा दिलाने की तैयारी में है।


पूर्णिया में निगरानी का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: अंचल कार्यालय का राजस्व कर्मचारी और महिला दलाल रंगे हाथ दबोचे, रिश्वत के 40 हजार बरामद!

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पूर्णिया। बिहार में सुशासन के दावों के बीच भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका ताजा प्रमाण पूर्णिया में देखने को मिला है। शुक्रवार को पटना से आई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्णिया पूर्व अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी लाल बाबू रजक और उनकी सहयोगी रूमी कुण्डु को 40,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिला समाहरणालय परिसर में हड़कंप मच गया है।

तस्वीर में देखें भ्रष्टाचार का चेहरा: निगरानी टीम की गिरफ्त में राजस्व कर्मचारी लाल बाबू रजक

साजिश का पर्दाफाश: दलाल के जरिए चल रहा था खेल

मिली जानकारी के अनुसार, राजस्व कर्मचारी लाल बाबू रजक सीधे पैसे न लेकर बिचौलियों के माध्यम से उगाही का खेल रच रहे थे। इस मामले में कप्तानपाड़ा (सदर थाना) की रहने वाली रूमी कुण्डु उनकी मुख्य सहयोगी की भूमिका निभा रही थी।

एक पीड़ित व्यक्ति ने निगरानी विभाग को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) या अन्य राजस्व संबंधी कार्य के लिए राजस्व कर्मचारी द्वारा भारी भरकम राशि की मांग की जा रही है। बिना पैसे दिए काम को लटकाया जा रहा था, जिससे तंग आकर पीड़ित ने निगरानी की शरण ली।

निगरानी की टीम ने बिछाया जाल

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का गुप्त सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद ब्यूरो ने एक धावा दल (Raid Team) का गठन किया। योजना के मुताबिक, जैसे ही पीड़ित ने राजस्व कर्मचारी के इशारे पर रूमी कुण्डु को 40,000 रुपये की गड्डी थमाई, सादे लिबास में तैनात निगरानी के जांबाजों ने दोनों को चारों तरफ से घेर लिया।

अंचल कार्यालय में मचा हड़कंप

गिरफ्तारी के समय मौके पर अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। राजस्व कर्मचारी लाल बाबू रजक ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया। तलाशी के दौरान रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली गई है। निगरानी की टीम दोनों आरोपियों को अपने साथ लेकर पटना रवाना हो गई है, जहाँ पूछताछ के बाद उन्हें विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। सरकारी कार्यालयों में जनता को परेशान करने वाले किसी भी अधिकारी या बिचौलिए को बख्शा नहीं जाएगा।”निगरानी अधिकारी


वायरल तस्‍वीर :डॉक्टर ने गले में हांडी और कमर में झाड़ू बांधकर दुनिया को चौंकाया, “भूल मत जाना वो ज़िल्लत, जो बाबा साहेब ने मिटाई”

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समाजसेवी राजेश कुमार का यह ‘क्रांतिकारी रूप’ देख फटी रह गईं लोगों की आँखें; मुरौल से सकरा तक चर्चा का विषय बना अनोखा प्रदर्शन।

 [सकरा/ मुजफ्फरपुर]: दो तस्वीरों की कहानी  बीते दिनों सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में कुछ तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं, जिन्होंने हर देखने वाले को सोचने पर मजबूर कर दिया। इन तस्वीरों में दो अलग-अलग इंसान नहीं, बल्कि एक ही व्यक्ति के दो व्यक्तित्व छिपे हैं। एक तस्वीर में राजेश कुमार अपनी साधारण वेशभूषा में एक गंभीर ग्रामीण चिकित्सक के रूप में दिखते हैं, जो लोगों का इलाज करते हैं। लेकिन बाकी तस्वीरों में उनका जो रूप सामने आया, वह ‘युगांतकारी’ है। गले में मिट्टी की हांडी (कटिया), कमर में बंधा झाड़ू और पैरों में छनछनाते घुंघरू—यह कोई तमाशा नहीं, बल्कि एक समाज के उस दंश की कहानी थी जिसे इतिहास के पन्नों में दबा दिया गया था।

“अतीत की बेड़ियाँ या भविष्य का आइना?” – समाजसेवी राजेश कुमार (बाएं: साधारण वेशभूषा में; दाएं: ऐतिहासिक झांकी के रूप में), गले में हांडी और कमर में झाड़ू बांधकर बाबा साहेब द्वारा दिलाए गए मान-सम्मान की याद दिलाते हुए।

क्यों बदला डॉक्टर ने अपना स्वरूप?

राजेश कुमार पेशे से एक ग्रामीण चिकित्सक हैं और समाज सेवा में सक्रिय रहते हैं। रैदास जयंती और अंबेडकर जयंती के अवसर पर उन्होंने जो वेशभूषा धारण की, उसका सीधा संबंध भारत के उस काले अतीत से है जब दलित समाज को अमानवीय परिस्थितियों में रहने पर मजबूर किया गया था।

राजेश कुमार बताते हैं कि आज की युवा पीढ़ी, जो सुख-सुविधाओं में पल रही है, वह भूल गई है कि उनके पूर्वजों ने कितनी ज़िल्लत झेली है। उनके इस रूप के तीन मुख्य संदेश थे:

  1. गले में हांडी: ताकि थूकने पर वह ज़मीन अपवित्र न हो।
  2. कमर में झाड़ू: ताकि पैरों के निशान रास्ते से मिटते चले जाएं।
  3. पैरों में घुंघरू: ताकि उनके आने की आवाज़ सुनकर ‘ऊंची जाति’ के लोग रास्ता बदल लें।

मुरौल से सकरा तक: चेतना की पदयात्रा

चिकित्सक राजेश कुमार इस गेटअप में केवल खड़े नहीं रहे, बल्कि उन्होंने मुरौल के अंबेडकर स्थल से लेकर लौतन, सुजावलपुर चौक, और सकरा ब्लॉक कैंपस तक की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने बच्चों और युवाओं को रोक-रोकर समझाया कि आज जो ‘टाई-बेल्ट’ और ‘साफ कपड़े’ हम पहन रहे हैं, वह बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संघर्षों और 1950 में लागू हुए संविधान की देन है।

चिकित्सक राजेश कुमार का कहना है:

आज हम बिसलेरी का पानी पीते हैं और कारों में घूमते हैं, लेकिन एक वक्त था जब हमारे पुरखों को जानवरों के नहाने के बाद पोखरों का पानी नसीब होता था। मैं यह झांकी इसलिए निकालता हूँ ताकि आने वाली पीढ़ी यह समझ सके कि शिक्षा ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे हम फिर से उस गुलामी की ओर नहीं लौटेंगे।”

तस्वीर के मायने: क्या संदेश मिलता है?

यह तस्वीर संदेश देती है कि स्मृति ही प्रतिरोध है” (Remembering is resisting)। राजेश कुमार का यह प्रयास बताता है कि एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति (चिकित्सक) जब अपने इतिहास को याद रखता है, तभी वह समाज को सही दिशा दे सकता है।

तस्वीर यह भी स्पष्ट करती है कि:

  • शिक्षा ही हथियार है: बाबा साहेब के ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के नारे को उन्होंने जमीन पर उतारने की कोशिश की है।
  • अधिकारों के प्रति सजगता: यह झांकी याद दिलाती है कि संविधान ने हमें इंसान होने का दर्जा दिया है।
  • त्याग की भावना: एक डॉक्टर होकर भी समाज को जगाने के लिए खुद को उस ‘अछूत’ के पुराने रूप में ढाल लेना, राजेश कुमार के साहस और समाज के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।

“आधी रोटी खाओ, पर बच्चों को पढ़ाओ”

इस पदयात्रा का  का सबसे मर्मस्पर्शी हिस्सा वह है जहाँ राजेश कुमार ‘शेरनी के दूध’ यानी शिक्षा की बात करते हैं। उनका मानना है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, लेकिन समाज को शिक्षा का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। सकरा ब्लॉक कैंपस में हुई संगोष्ठी हो या मथुरापुर में बाबा साहेब की मूर्ति का अनावरण, हर जगह इस ‘डॉक्टर’ ने अपनी झांकी से यह साबित कर दिया कि असली इलाज शरीर का नहीं, बल्कि समाज की सोच का करना ज़रूरी है।


ज्ञानामृत का शंखनाद: MDDM कॉलेज ने रचा इतिहास; ‘समाचार दर्शन’ के पन्नों में कैद हुई नारी सशक्तिकरण की बुलंद आवाज!

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विशेष रिपोर्ट: केवल सूचना संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान की अविरल धारा है ज्ञानामृत‘; कुलपति ने पत्रिका को बताया भविष्य का मार्गदर्शक।

मुजफ्फरपुर | 16 अप्रैल, 2026 बिहार के प्रतिष्ठित महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) ने अपने 80वें स्थापना वर्ष के मुहाने पर एक नया बौद्धिक कीर्तिमान स्थापित किया है। गुरुवार को महाविद्यालय की महत्वाकांक्षी पत्रिका ज्ञानामृत : समाचार दर्शन के प्रवेशांक का भव्य लोकार्पण किया गया। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय, महंत दर्शन दास जी के भ्रातृज डॉ. विजय कुमार शर्मा और प्राचार्या प्रो. (डॉ.) अलका जायसवाल ने संयुक्त रूप से इस वैचारिक दस्तावेज को सार्वजनिक किया।

पत्रिका का समालोचनात्मक विश्लेषण: अतीत और भविष्य का सेतु

‘ज्ञानामृत’ का यह प्रवेशांक केवल एक कॉलेज मैगजीन नहीं, बल्कि एमडीडीएम कॉलेज के गौरवशाली इतिहास और आधुनिक विजन का एक जीवंत दस्तावेज नजर आता है।

  • इतिहास की गहराई: पत्रिका के शुरुआती पन्नों में 15 अगस्त 1946 को महंत दर्शन दास जी द्वारा स्थापित इस संस्थान की यात्रा को बारीकी से समेटा गया है। इसमें उन संघर्षों और संकल्पों का जिक्र है, जिसने उत्तर बिहार में स्त्री शिक्षा की नींव रखी।
  • संपादकीय दृष्टिकोण: हिंदी विभागाध्यक्ष और मीडिया प्रभारी डॉ. राकेश रंजन के संपादन में तैयार यह पत्रिका ऋग्वेद के ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ और उपनिषदों के ‘उत्तिष्ठत जाग्रत’ जैसे गंभीर जीवन दर्शन से साक्षात्कार कराती है। संपादक ने स्पष्ट किया है कि यह पत्रिका केवल ‘सूचना का संग्रह’ नहीं, बल्कि ‘अविरल ज्ञान परंपरा’ का प्रवाह है।
  • प्राचार्या का विजन: प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने अपने संदेश में इसे सकारात्मक संवाद का एक नया मंच बताया है। पत्रिका के पन्ने महाविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, सांस्कृतिक गतिविधियों और खेलकूद के प्रतिवेदन (2025-26) से सजे हैं, जो संस्थान की सर्वांगीण विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

धमाकेदार विमोचन: बौद्धिक जगत में हलचल

विमोचन समारोह के दौरान कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने पत्रिका की प्रशंसा करते हुए इसे विश्वविद्यालय के गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि “ज्ञानामृत” के पन्ने यह गवाही देते हैं कि यहाँ की बेटियाँ केवल डिग्रियाँ नहीं ले रहीं, बल्कि देश की बागडोर संभालने के लिए तैयार हो रही हैं।

इस अवसर पर गणित विभागाध्यक्ष डॉ. माला, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. एम सदफ, डॉ. प्रियम फ्रांसिस और डॉ. रिंकु कुमारी सहित पूरी संपादकीय टीम की मेहनत को सराहा गया।

समालोचना: क्या कहती है यह पत्रिका?

पत्रिका का सूक्ष्म अवलोकन करने पर पता चलता है कि इसमें मधुबनी पेंटिंग, फैशन डिजाइनिंग और ब्यूटीशियन जैसे सर्टिफिकेट कोर्स और बीबीए-बीसीए जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को प्रमुखता दी गई है। यह इस बात का संकेत है कि कॉलेज अब पारंपरिक शिक्षा से आगे निकलकर कौशल विकास (Skill Development) की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। साथ ही, ‘ज्ञानामृत’ में प्रकाशित विविध चित्र और समाचार कतरनें यह प्रमाणित करती हैं कि मुजफ्फरपुर का यह कॉलेज डिजिटल युग में भी प्रिंट मीडिया के महत्व को बखूबी समझता है।

पत्रिका ‘ज्ञानामृत : समाचार दर्शन’ के प्रवेशांक  का कॅवर पृष्‍ठ  

एमडीडीएम की ‘धाकड़’ बेटियों ने मैदान में गाड़े जीत के झंडे; ‘फिमेल फाइटर’ और ‘विकेट वारियर’ बनीं चैंपियन!

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महंत दर्शन दास जयंती समारोह में कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने विजेताओं को किया पुरस्कृत; दौड़ में सलोनी और आंचल की रफ्तार का जलवा, क्रिकेट में रंजना वुमन ऑफ द मैच

मुजफ्फरपुर | 16 अप्रैल, 2026 महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के खेल मैदान पर आज सिर्फ जोश, जुनून और जीत की गूँज सुनाई दी। अवसर था महंत दर्शन दास जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के भव्य पुरस्कार वितरण समारोह का। जहाँ अपनी प्रतिभा के दम पर छात्राओं ने यह साबित कर दिया कि वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. दिनेश चंद्र राय और डॉ. विजय कुमार शर्मा ने विजेताओं को मेडल पहनाकर और प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया।

ट्रैक पर सलोनी और आंचल की बादशाहत, शतरंज में सृष्टि ने दी मात

एथलेटिक्स के मुकाबलों में छात्राओं ने अपनी रफ्तार से सबको हैरान कर दिया। 100 मीटर दौड़ में सलोनी कुमारी ने बिजली जैसी गति से प्रथम स्थान झटका, वहीं सुप्रिया और साक्षी कुमारी क्रमशः दूसरे व तीसरे स्थान पर रहीं। 200 मीटर दौड़ में आंचल कुमारी ने बाजी मारी, जबकि अर्थशास्त्र विभाग की साक्षी कुमारी दूसरे और अंग्रेजी विभाग की साक्षी कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं।

दिमाग की जंग शतरंज में सृष्टि कुमारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि अर्जिता रानी दूसरे और शालिनी सलोनी तीसरे स्थान पर रहीं। कैरम में परिधि राज चैंपियन बनीं। टेबल टेनिस में रुचि रंजन ने अपना दबदबा कायम रखा।

कबड्डी और क्रिकेट में वारियर्सका दबदबा

मैदानी खेलों में कबड्डी और क्रिकेट का रोमांच चरम पर था, जहाँ टीम वर्क और रणनीति ने जीत दिलाई।

1. कबड्डी प्रतियोगिता: ‘फिमेल फाइटर टीम’ ने अपने शानदार दांव-पेंच और जबरदस्त डिफेंस से विपक्षी टीम को पछाड़कर विजेता का खिताब अपने नाम किया।

  • विजेता टीम (फिमेल फाइटर): आंचल कुमारी, खुशी कुमारी, शिवानी कुमारी, दीपिका कुमारी, शालिनी सलोनी, वन्दना कुमारी, आयुषी कुमारी और अर्जिता रानी।
  • उपविजेता टीम (सुपर लीडरस): काजल कुमारी, परिधि राज, सलोनी कुमारी, अनामिका कुमारी, प्रतिमा कुमारी, स्मृति राज, प्रीति कुमारी और प्रियंका कुमारी।

2. क्रिकेट प्रतियोगिता: क्रिकेट के मैदान पर ‘विकेट वारियर टीम’ ने अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी के संतुलित प्रदर्शन से ‘गोल्डन गली टीम’ को हराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

  • विजेता टीम (विकेट वारियर): रंजना कुमारी (कप्तान), अनामिका कुमारी, शालिनी सलोनी, परिधि राज, अर्जिता रानी, श्वेता कुमारी, प्रतिमा कुमारी, साक्षी कुमारी, रूपाली कुमारी, लक्ष्मी कुमारी और सुप्रिया।
  • उपविजेता टीम (गोल्डन गली): काजल कुमारी (कप्तान), खुशी कुमारी, अंशिका कुमारी, आँचल कुमारी, वन्दना कुमारी, सलोनी कुमारी, प्रियंका कुमारी, कशिश कुमारी, लक्ष्मी द्वितीय, लक्की राज और सुजाता कुमारी।
  • विशेष पुरस्कार: ‘विकेट वारियर’ की रंजना कुमारी को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए वुमन ऑफ द मैच चुना गया, जबकि अनामिका कुमारी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज बनीं।

गुरुओं ने भी दिखाया दमखम, म्यूजिकल चेयर में डॉ. सुरबाला वर्मा विजेता

छात्राओं के साथ-साथ कॉलेज की शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने भी खेल भावना का परिचय देते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, जिन्हें कुलपति महोदय द्वारा पुरस्कृत किया गया।

  • शिक्षिकाएं: ‘म्यूजिकल चेयर’ में डॉ. सुरबाला वर्मा विजेता रहीं, ‘स्पून मार्बल’ में डॉ. अर्चना गुप्ता और ‘सुई-धागा’ प्रतियोगिता में डॉ. सुनीता कुमारी ने प्रथम पुरस्कार जीता।
  • कर्मचारी: कर्मचारियों के बीच सोनम कुमारी (म्यूजिकल चेयर व सुई-धागा दोनों में प्रथम) और संजीव कुमार (स्पून मार्बल में प्रथम) ने शानदार खेल दिखाया।

गरिमामयी उपस्थिति

इस ऐतिहासिक पल का गवाह एमडीडीएम कॉलेज की सैकड़ों छात्राएं, शिक्षक और कर्मचारी बने। मंच का सफल संचालन डॉ. आशा सिंह यादव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. स्वस्ति वर्मा द्वारा दिया गया। इस मौके पर प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल सहित कॉलेज के तमाम शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित थे।

नारी शिक्षा के ‘सूरज’ महंत दर्शन दास को एमडीडीएम कॉलेज ने किया नमन; कुलपति बोले- ‘बेटियों के हाथ में है देश की बागडोर’

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कॉलेज में गूँजा नारी सशक्तिकरणका मंत्र, 132वीं जयंती पर छात्राओं ने बिखेरा जलवा, ‘ज्ञानामृतपत्रिका का हुआ भव्य विमोचन।

मुजफ्फरपुर | 16 अप्रैल, 2026 बिहार में नारी शिक्षा की अलख जगाने वाले पुरोधा और एमडीडीएम कॉलेज के संस्थापक महंत दर्शन दास जी की 132वीं जयंती गुरुवार को महाविद्यालय परिसर में पूरी भव्यता के साथ मनाई गई। इस अवसर पर ‘जयंती समारोह’ के साथ-साथ ‘वार्षिक खेलकूद पुरस्कार वितरण’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया गया।

उज्ज्वल भविष्य की ज्योति: दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन करते कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय।

संस्थापक की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. दिनेश चंद्र राय, विशिष्ट अतिथि डॉ. विजय कुमार शर्मा (पूर्व प्रोफेसर, आईआईटी खड़गपुर) और प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल द्वारा महंत दर्शन दास जी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन और छात्राओं द्वारा प्रस्तुत विश्वविद्यालय गीत ने समारोह में सांस्कृतिक छटा बिखेर दी।

नारी सशक्तिकरण की रखी थी मजबूत नींव

मुख्य वक्ता डॉ. विजय कुमार शर्मा, जो महंत जी के भ्रातृज भी हैं, ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महंत दर्शन दास जी शब्द के सच्चे अर्थों में समाज सेवा की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने उस दौर में बालिका विद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थापना की, जब समाज में महिला शिक्षा को लेकर चुनौतियां थीं। उन्होंने कहा, नारी सशक्त होगी तो ही परिवार, समाज और राष्ट्र सशक्त होगा।”

आस्था और आदर: महंत दर्शन दास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करतीं प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल व अन्य अतिथि।

कुलपति का आह्वान: डॉक्टर-इंजीनियर से आगे सोचें बेटियाँ

छात्राओं को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि समाज के लिए कुछ कर गुजरने वाले लोग इतिहास में सदैव अमर रहते हैं। उन्होंने एमडीडीएम कॉलेज के गौरवशाली इतिहास की चर्चा करते हुए कहा:

“छात्राओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे भविष्य में देश की बागडोर संभालेंगी। केवल डॉक्टर और इंजीनियर बनने तक सीमित न रहें, बल्कि सेवा के हर क्षेत्र में आगे आएं। अपने स्वास्थ्य और खेलकूद पर भी उतना ही ध्यान दें जितना पढ़ाई पर।”

सम्मान का क्षण: मेडल और सर्टिफिकेट पाकर मुस्कुरातीं एमडीडीएम कॉलेज की विजेता छात्राएं।

ज्ञानामृतपत्रिका का विमोचन और सम्मान की बौछार

समारोह के दौरान महाविद्यालय की पत्रिका ज्ञानामृत : समाचार दर्शन” के प्रवेशांक का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही वर्ष भर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मेडल और प्रशस्ति पत्र दिए गए। पुरस्कार पाकर छात्राओं के चेहरे खिल उठे।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

मंच का सफल संचालन डॉ. आशा सिंह यादव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. स्वस्ति वर्मा ने किया। कार्यक्रम में मीडिया प्रभारी डॉ. राकेश रंजन, डॉ. माला, डॉ. एम सदफ, डॉ. रिंकु कुमारी, डॉ. प्रियम फ्रांसिस समेत भारी संख्या में शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और छात्राएं उपस्थित रहीं।


लाल झंडे के गढ़ में चुनावी शंखनाद: 14 सीटों के लिए 33 दावेदार, माले के आंतरिक लोकतंत्र ने पेश की मिसाल!

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समस्तीपुर | 16 अप्रैल 2026 (विशेष संवाददाता)

समस्तीपुर के मालगोदाम चौक स्थित भाकपा माले जिला कार्यालय में बुधवार को ‘लोकतंत्र’ का एक अलग ही चेहरा देखने को मिला। मौका था दरभंगा में होने वाले आगामी राज्य सम्मेलन के लिए डेलीगेट (प्रतिनिधि) चुनाव का। जहाँ अक्सर राजनीतिक दलों पर ‘हाईकमान’ के फैसले थोपने के आरोप लगते हैं, वहीं भाकपा माले ने मतदान के जरिए अपने प्रतिनिधि चुनकर एक कड़ा संदेश दिया है।

अनुशासन और अधिकार: भीषण गर्मी के बावजूद कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते निचले स्तर के कमिटी पदाधिकारी।

33 सूरमा और 444 निर्णायक: रात भर चली वोटों की गिनती

जिला सचिव प्रो० उमेश कुमार की देखरेख में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि महज 14 पदों के लिए 33 दिग्गज उम्मीदवार मैदान में उतरे। मतदाताओं की सूची में जिला कमिटी से लेकर पंचायत और शाखा स्तर के 444 सचिव व सदस्य शामिल थे। देर रात तक चली वोटिंग के बाद अब परिणाम घोषित किए जा रहे हैं, जो पार्टी के भीतर की नई शक्ति संरचना को तय करेंगे।

राज्य कमिटी सदस्य सह चुनाव पर्यवेक्षक कॉ० ध्रुव नारायण कर्ण

पर्यवेक्षक का दोटूक बयान: “यह महज चुनाव नहीं, जागरूकता का प्रमाण है”

राज्य कमिटी सदस्य सह चुनाव पर्यवेक्षक कॉ० ध्रुव नारायण कर्ण ने बयान जारी कर इस पूरी प्रक्रिया को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा:

निर्वाचक मंडल के 444 लोग मिलकर 33 में से 14 सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों को चुन रहे हैं। यह भाकपा माले के भीतर के अटूट आंतरिक लोकतंत्र को दर्शाता है। एक-एक कार्यकर्ता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक है और यह चुनाव उसी जागरूकता की जीत है।”

लोकतंत्र की बुनियादी मजबूती: भाकपा माले कार्यालय में मतपेटी में अपना भविष्य और विश्वास डालते पार्टी कार्यकर्ता।

बिहार को भाजपा की प्रयोगशालाबनने से रोकने की रणनीति

इस चुनाव का महत्व सिर्फ पदों तक सीमित नहीं है। जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि यहाँ से जीते हुए 14 डेलीगेट 16 से 18 मई तक दरभंगा में होने वाले राज्य सम्मेलन में समस्तीपुर की आवाज बनेंगे। इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा बिहार में बढ़ती बेरोजगारी, बदहाल स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा में भ्रष्टाचार और राज्य को सांप्रदायिक राजनीति की ‘प्रयोगशाला’ बनाने की कोशिशों के खिलाफ एक निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंकना है।


मुख्य हाइलाइट्स:

  • स्थान: जिला कार्यालय, मालगोदाम चौक, समस्तीपुर।
  • मुकाबला: 33 उम्मीदवार बनाम 14 पद।
  • वोटर: 444 (पंचायत से लेकर जिला स्तर के पदाधिकारी)।
  • अगला पड़ाव: 16-18 मई, राज्य सम्मेलन, दरभंगा।

समस्तीपुर की सड़कों पर फूटा अभिभावकों का गुस्सा; निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आर-पार की जंग!

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समस्तीपुर | 15 अप्रैल 2026

मुख्य बिंदु:

  • कमीशनखोरी का खेल: किताब, ड्रेस और जूते-मोजों पर भारी कमीशन का विरोध।
  • शुल्कों की भरमार: री-एडमिशन और विकास शुल्क के नाम पर ‘अवैध वसूली’ का आरोप।
  • प्रशासन को अल्टीमेटम: जिलाधिकारी से जांच और ठोस कार्रवाई की मांग।

लूटतंत्र के खिलाफ एकजुट समस्तीपुर: निजी स्कूलों की मनमानी और कमीशनखोरी के विरोध में ‘नागरिक समाज’ का जोरदार प्रदर्शन।”

विस्तृत रिपोर्ट

समस्तीपुर: शिक्षा के मंदिर अब व्यापार के केंद्र बनते जा रहे हैं। निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब पर सरेआम डाले जा रहे डाके के खिलाफ आज नागरिक समाज ने जिला मुख्यालय में हुंकार भरी। शहर की सड़कों पर उतरे आक्रोशित नागरिकों ने निजी स्कूलों की कमीशनखोरी और अवैध वसूली के खिलाफ एक विशाल प्रतिरोध मार्च निकाला।

कमीशन के मकड़जाल में फंसे अभिभावक मार्च के दौरान समाहरणालय पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने निजी स्कूलों के काले कारनामों की परतें खोलीं। संयोजक रामबली सिंह ने कहा, “निजी विद्यालय अब शिक्षा नहीं, बल्कि टाई, बेल्ट, डायरी और किताबों का धंधा कर रहे हैं। हर साल जानबूझकर किताबें बदल दी जाती हैं ताकि अभिभावक पुरानी किताबों का उपयोग न कर सकें और स्कूल द्वारा निर्धारित दुकानों से महंगी सामग्री खरीदने को मजबूर हों।”

री-एडमिशन और विकास शुल्क पर तीखा प्रहार सभा का संचालन करते हुए भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि स्कूलों ने ‘विकास शुल्क’ और ‘री-एडमिशन’ जैसे शब्दों को उगाही का जरिया बना लिया है। उन्होंने मांग की कि सभी निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें अनिवार्य की जाएं और स्कूलों के भीतर पठन सामग्री की बिक्री पर तत्काल रोक लगे।

प्रशासन को चेतावनी मार्च में आइसा, आरवाईए, राजद और कांग्रेस सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की शुल्क संरचना और बुनियादी सुविधाओं की जांच कर इस लूट को नहीं रोका, तो यह आंदोलन उग्र रूप लेगा। सभा के अंत में एक मांग पत्र जिला प्रशासन को सौंपा गया, जिसमें अवैध वसूली करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

मौके पर मौजूद प्रमुख चेहरे

इस प्रतिरोध मार्च में सुनील कुमार, लोकेश राज, रौशन कुमार, राम विनोद पासवान, अमित जायसवाल, रेल ट्रेड यूनियन नेता संतोष कुमार निराला और अधिवक्ता संजय कुमार बबलू सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और अभिभावक उपस्थित थे।


हिंदू समाज की एकजुटता से थर्राएंगी विघटनकारी शक्तियां: मुजफ्फरपुर में सामाजिक सद्भाव का शंखनाद!

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मुजफ्फरपुर (सकरा)। विभाजनकारी ताकतों को कड़ा संदेश देने और हिंदू समाज के भीतर की दूरियों को मिटाने के लिए बुधवार को सकरा खंड में एक बड़ी वैचारिक क्रांति का आगाज हुआ। विष्णुपुर बघनगरी स्थित शिवालय सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्रांगण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ में एकता का ऐसा सैलाब उमड़ा जिसने स्पष्ट कर दिया कि अब समाज को जातियों में बांटने वाली राजनीति सफल नहीं होगी।

“एकता का संकल्प: सकरा के विष्णुपुर बघनगरी में सामाजिक सद्भाव बैठक के बाद एकजुटता प्रदर्शित करते समाज के विभिन्न वर्गों के लोग और संघ के पदाधिकारी।”

समरसता से ही सशक्त होगा राष्ट्र

बैठक को मुख्य मार्गदर्शक के रूप में संबोधित करते हुए मुजफ्फरपुर विभाग निरीक्षक राजेश रंजन जी ने कहा कि हिंदू समाज का संगठित होना किसी के विरोध में नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि जब समाज का हर वर्ग कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होगा, तभी विघटनकारी शक्तियां परास्त होंगी।

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित बैठक के दौरान सामाजिक समरसता के विषयों पर चर्चा सुनते क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक एवं मातृशक्ति।”

एक जाजम पर बैठे सभी वर्ग

विभाग कार्यवाह अरविंद जी के कुशल संचालन में आयोजित इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि इसमें समाज के हर तबके के गार्जियन, युवाओं और महिलाओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। खुले सत्र में चर्चा की गई कि कैसे आपसी भाईचारे और रोटी-बेटी के संबंधों को मजबूत कर सामाजिक समरसता को गांव-गांव तक ले जाया जाए।

सामाजिक समरसता की शपथ

बैठक के अंत में उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि वे छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों को जड़ से मिटाएंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपनत्व का भाव पहुँचता है।