समस्तीपुर | 12 अप्रैल, 2026 दुनिया आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहाँ एक तरफ प्रगति के बड़े-बड़े दावे हैं, तो दूसरी तरफ महाविनाशकारी महायुद्ध की जलती हुई आग। सामरिक शक्ति के प्रदर्शन और वर्चस्व की इस अंधी दौड़ में मानवता कराह रही है। इसी वैश्विक संकट के बीच समस्तीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्र सेवा दल (बिहार) के प्रतिनिधि सुरेन्द्र कुमार ने एक अपील जारी कर दुनिया के वर्तमान हालातों और सत्ताधीशों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
बाजारवाद और निरंकुश सत्ता का घातक गठजोड़
सुरेन्द्र कुमार ने अपने वक्तव्य में वैश्विक राजनीति के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि आज दुनिया की लोकतांत्रिक सरकारें ‘बाजारवादी मानसिकता वाले स्वार्थी नीति-निर्धारकों‘ की कठपुतली बन चुकी हैं। उन्होंने इसके कारण पर इशारा करते हुए कहा कि सत्ता जब जनसेवा के बजाय व्यापारिक मुनाफे और साम्राज्यवादी विस्तार की सोच से ग्रस्त हो जाती है, तो वह ‘निरंकुश’ हो जाती है। आज की सरकारें हथियारों की नुमाइश को ही राष्ट्रवाद समझ बैठी हैं, जबकि हकीकत में यह महाविनाश का आमंत्रण है।
महामारी पर जीत तो तानाशाहों पर क्यों नहीं?
सुरेन्द्र कुमार ने एक तार्किक सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विज्ञान और मानव संकल्प ने पोलियो, चेचक, हैजा और हाल ही में कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, तो फिर हम इन ‘बेकाबू तानाशाहों’ और युद्धोन्मादी शासकों से मुक्ति पाने में अक्षम क्यों हैं? सुरेन्द्र कुमार के अनुसार, तानाशाही किसी वायरस से कम खतरनाक नहीं है, जो पूरी दुनिया की शांति और समृद्धि को लील रही है।
युवा ऊर्जा: सृजन या विध्वंस?
खबर का सबसे मर्मस्पर्शी पहलू युवाओं और बच्चों की अनदेखी है। सुरेन्द्र कुमार ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की आधी आबादी युवाओं की है, लेकिन उनकी आकांक्षाएं किसी भी सरकार के एजेंडे में नहीं हैं।
रोजगार बनाम हथियार: सरकारों ने कभी यह नहीं पूछा कि नौजवानों को किस तरह के रोजगार की जरूरत है। उनकी असीम ऊर्जा को नवीनतम तकनीक और सृजन में लगाने के बजाय युद्ध की भट्टी में झोंका जा रहा है।
शोषित बचपन: जब तक दुनिया में शांति की ‘गारंटी’ नहीं होगी, तब तक हम बाल मजदूरी, बाल विवाह और बाल यौन शोषण जैसे जघन्य अपराधों को समाप्त नहीं कर पाएंगे।
वैकल्पिक मार्ग: शांति, सद्भाव और गांधीवाद
सुरेन्द्र कुमार ने विश्व के तमाम समतावादी, समाजवादी और गांधीवादी विचारधारा के लोगों से अपील की है कि वे युद्ध के उन्माद के खिलाफ एकजुट हों। उन्होंने जोर दिया कि असली ‘सामरिक प्रदर्शन’ हथियारों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षा और संरक्षण के साधन जुटाना होना चाहिए। युवाओं के लिए वैकल्पिक रोजगार की संभावनाएं तलाशना ही वह प्रार्थना है जो विश्व को महाविनाश से बचा सकती है।
सम्मेलन की तैयारियों को लेकर गांधी चौक पर जुटी प्रखंड कमिटी, मिशन 2026 के लिए कसी कमर
12 अप्रैल 2026|ताजपुर (समस्तीपुर): ताजपुर प्रखंड के गांधी चौक पर रविवार को भाकपा माले प्रखंड कमिटी की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पार्टी ने सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बैठक में न केवल संगठन की मजबूती पर चर्चा हुई, बल्कि भविष्य के बड़े आंदोलनों की रूपरेखा भी तैयार की गई।
ताजपुर के गांधी चौक पर आयोजित भाकपा माले की बैठक में उपस्थित सदस्य संगठन की मजबूती एवं आगामी आंदोलनों का संकल्प लेते हुए।
जनता की समस्याओं पर सरकार को घेरने की तैयारी
बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज आम जनता महंगाई और बेरोजगारी की दोहरी मार झेल रही है। किसान और मजदूर बेहाल हैं, लेकिन प्रशासन मौन है। प्रखंड कमिटी ने निर्णय लिया है कि:
बिजली और राशन में धांधली: बिजली आपूर्ति की अनियमितता और राशन वितरण में हो रही व्यापक गड़बड़ी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य: बदहाल सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए गांव-गांव में जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा।
पंचायत स्तर पर घेराबंदी: हर पंचायत में शाखा कमिटी को सक्रिय कर नए सदस्यों को जोड़ा जाएगा और जल्द ही प्रखंड मुख्यालय पर एक विशाल ‘हल्ला बोल‘ धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
चुनावी और सांगठनिक एजेंडा तय
आगामी राज्य और जिला सम्मेलनों को सफल बनाने के लिए पार्टी ने समय-सारणी निर्धारित की है:
15 अप्रैल: समस्तीपुर शहर के मालगोदाम चौक स्थित जिला कार्यालय में राज्य सम्मेलन के डेलीगेट चुनाव हेतु निर्वाचक मंडल के सदस्य मतदान करेंगे।
18-19 अप्रैल: कल्याणपुर के वीरसिंगपुर में आयोजित होने वाले जिला सम्मेलन में ताजपुर से बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
16-18 मई: दरभंगा में होने वाले ऐतिहासिक राज्य सम्मेलन की सफलता के लिए घर-घर जाकर कोष संग्रह और पर्चा वितरण किया जाएगा।
इनकी रही मौजूदगी
रणनीतिक बैठक में प्रखंड के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, संजीव राय, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, प्रभात रंजन गुप्ता, आसिफ होदा, मनोज कुमार सिंह, मो० एजाज, रंजू कुमारी, जीतेंद्र सहनी, और ललन दास शामिल थे। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि पार्टी का अगला लक्ष्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाना है।
मोतिहारी/पटना। भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार में नीतीश सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान आज उस वक्त और तेज दिखा, जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) की टीम ने पूर्वी चम्पारण के आदापुर थाने में तैनात एक निजी मुंशी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
कानून के फंदे में घूसखोर: निगरानी विभाग की टीम द्वारा 14,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया आदापुर थाने का मुंशी इन्तेखाब आलम (लाल घेरे में)।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, आदापुर थाना अंतर्गत बखरी गांव के निवासी आफताब अंसारी ने हथियार के लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था। थानाध्यक्ष द्वारा सत्यापन (Verification) कराने और रिपोर्ट भेजने के एवज में थाने का निजी मुंशी इन्तेखाब आलम लगातार रुपयों की मांग कर रहा था। परेशान होकर पीड़ित ने इसकी शिकायत पटना स्थित निगरानी ब्यूरो कार्यालय में की।
जाल बिछाकर दबोचा गया आरोपी
शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने मामले की गुप्त जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक गौतम कृष्ण के नेतृत्व में एक विशेष ‘धावादल’ (Raid Team) का गठन किया गया।
शनिवार (11 अप्रैल, 2026) को जैसे ही आरोपी मुंशी इन्तेखाब आलम ने आदापुर स्थित जमुनापुर चौक पर पीड़ित से 14,000 रुपये की घूस ली, वैसे ही सादे लिबास में तैनात निगरानी की टीम ने उसे दबोच लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से चौक पर हड़कंप मच गया।
मुजफ्फरपुर कोर्ट में होगी पेशी
गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी को लेकर पटना रवाना हो गई है। पूछताछ और कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी को मुजफ्फरपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में पेश किया जाएगा। ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में और कौन-कौन शामिल है, इसकी भी गहनता से जांच की जा रही है।
समस्तीपुर | 11 अप्रैल 2026 नालंदा जिले के नूरसराय में प्रजापति समाज की महिला के साथ हुई रूह कंपा देने वाली अमानवीय घटना के विरोध में आज समस्तीपुर की सड़कें आक्रोश और न्याय की मांग से गूंज उठीं। प्रजापति समन्वय समिति के बैनर तले आयोजित इस विशाल कैंडल मार्च ने शासन और प्रशासन को कड़ा संदेश दिया है कि अब नारी सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं होगा।
न्याय की लौ: नूरसराय (नालंदा) की घटना के विरोध में समस्तीपुर समाहरणालय पर कैंडल मार्च निकालते प्रजापति समन्वय समिति के सदस्य एवं आक्रोशित ग्रामीण।
समाहरणालय से शुरू हुआ आक्रोश का सफर
सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग हाथों में जलती कैंडल और इंसाफ की तख्ती लेकर समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) के गेट पर एकत्रित हुए। यहाँ से शुरू हुआ मार्च पूरे जिला मुख्यालय का भ्रमण करते हुए वापस समाहरणालय पर एक सभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों के नारों से पूरा वातावरण आवेशित रहा, जिसमें दोषियों को फांसी देने और मां-बहन-बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख थी।
“स्पीडी ट्रायल चलाकर दरिंदों को मिले फांसी”
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सरकार की कानून व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए। नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा:
“नूरसराय की घटना मानवता पर कलंक है। हम मांग करते हैं कि इस मामले का स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बने। अगर हमारी बेटियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली, तो यह आंदोलन जिला मुख्यालय से निकलकर पूरे प्रदेश में फैलेगा।”
जिलाधिकारी को सौंपा मांगपत्र, दी चेतावनी
मार्च के समापन पर प्रदर्शनकारियों ने मौके पर उपस्थित मजिस्ट्रेट के माध्यम से जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि दोषियों पर तत्काल और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
मौके पर मौजूद रहे: प्रमोद कुमार पंडित, महेंद्र पंडित, लक्ष्मी पंडित, दिलीप कुमार प्रजापति, सोहन कुमार पंडित, रामदयाल पंडित, योगेन्द्र पंडित, राजेश पंडित, सुरेंद्र पंडित, राकेश पंडित, राम प्रह्लाद पंडित, मोहन पंडित, बृजमोहन पंडित, मनोज पंडित, रामाशीष पंडित एवं भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह सहित भारी संख्या में गणमान्य लोग।
मुजफ्फरपुर। सकरा के पूर्व विधायक, बिहार विधानसभा के पूर्व मुख्य सचेतक और दलित-पिछड़ों की बुलंद आवाज रहे स्वर्गीय फकीरचंद राम की 29वीं पुण्यतिथि शनिवार को उनके स्मृति कार्यालय स्थित स्मारक पर श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित नेताओं और समर्थकों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
“श्रद्धांजलि: पूर्व विधायक स्व० फकीरचंद राम की 29वीं पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करते जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल, उमेश कुमार राम एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति।”
ईमानदारी और संघर्ष के प्रतीक थे फकीरचंद बाबू: अरविंद मुकुल
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि फकीरचंद बाबू कांग्रेस पार्टी के एक ऐसे स्तंभ थे, जिनका व्यक्तित्व ईमानदारी और मिलनसारिता की मिसाल था। उन्होंने कहा, “फकीरचंद जी ने अपना पूरा जीवन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति, दलितों और पिछड़ों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनके द्वारा किए गए संघर्ष आज भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।”
सकरा कॉलेज का सरकारीकरण: एक अविस्मरणीय उपलब्धि
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम ने फकीरचंद बाबू के योगदानों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सकरा के चौतरफा विकास के लिए उन्होंने जो कार्य किए, उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। विशेष रूप से सकरा कॉलेज के सरकारीकरण में उनकी मुख्य भूमिका ने क्षेत्र में शिक्षा की मशाल जलाई। जनहित में उनके द्वारा किए गए साहसिक कार्यों के कारण ही वे आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
इन दिग्गजों ने अर्पित किए श्रद्धा-सुमन
पुण्यतिथि कार्यक्रम में मुख्य रूप से अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि अनीता देवी, श्रद्धा खुशी, शिवम कुमार, सिद्धार्थ कुमार, डॉ. मनीष यादव, मो. गुलाम मैनुद्दीन, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, रामचंद्र राम, मो. ज़ुबैर आलम, विश्वनाथ राम, मो. हैदर रजक, नुनू राय, लालाबाबू राम और संजय चौधरी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मुजफ्फरपुर। महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) में शनिवार को कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कॉलेज के ब्यूटी केयर विभाग द्वारा आयोजित ‘मेहंदी प्रतियोगिता’ में छात्राओं ने अपनी सृजनात्मकता का ऐसा जादू बिखेरा कि हर कोई देखता रह गया। छात्राओं ने न केवल अपनी प्रतिभा दिखाई, बल्कि कॉलेज के शिक्षकों के हाथों पर पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों की मेहंदी लगाकर इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया।
“हुनर की छाप: एमडीडीएम कॉलेज में आयोजित मेहंदी प्रतियोगिता के दौरान अपनी कला का प्रदर्शन करतीं छात्राएं और उनके हुनर की सराहना करतीं प्राचार्या प्रो. अलका जयसवाल (मोबाईल लिए मध्य में) व अन्य शिक्षिका ।”
प्राचार्या ने बढ़ाया उत्साह : कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्या प्रो. अलका जयसवाल ने कहा कि मेहंदी केवल श्रृंगार नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति और कला प्रदर्शन का एक उत्तम माध्यम है। उन्होंने छात्राओं के कौशल की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इन्होंने मारी बाजी कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच निर्णायक मंडल ने विजेताओं की घोषणा की:
प्रथम स्थान: सोफिया परवीन
द्वितीय स्थान: गुंजन कुमारी एवं आरती कुमारी
तृतीय स्थान: नीता कुमारी एवं मुस्कान कुमारी
इनका रहा विशेष योगदान यह भव्य आयोजन ब्यूटी केयर विभाग की समन्वयक डॉ. रिंकु कुमारी के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग की सहायक पिंकी कुमारी और ब्यूटीशियन मधु प्रिया ने अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर कॉलेज के कई शिक्षक और भारी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।
मुजफ्फरपुर (मुरौल): सरकारी फाइलों में डिजिटल इंडिया के सपने सजाए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर ‘डिजिटल धांधली’ का ऐसा खेल चल रहा है जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। मामला नगर पंचायत मुरौल का है, जहाँ की आधिकारिक वेबसाइट e-murol.com पर मुरौल की नहीं, बल्कि कटिहार जिले के ‘बारसोई नगर पंचायत‘ की तस्वीर चमक रही है। यह महज एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि मुरौल की जनता की अस्मिता और उनके खून-पसीने की कमाई (टैक्स) के साथ किया गया एक भद्दा मजाक है।
तस्वीर में नगर पंचायत मुरौल के बदले कटिहार जिले के ‘बारसोई नगर पंचायत’ की चमकती तस्वीर, नीचे लाल इनसेट में ‘बारसोई नगर पंचायत’ की जूम इन तस्वीर
लाखों की बंदरबांट, फिर भी वेबसाइट ‘उधार‘ की?
हैरानी की बात यह है कि इस वेबसाइट के नाम पर कंपनी को लाखों रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बावजूद इसके, साइट पर मुरौल की कोई पहचान नहीं दिखती। यहाँ तक कि भौगोलिक जानकारी में गलतियां भरी पड़ी हैं। वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने सीधे तौर पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि, “नगर पंचायत की नींव ही कमजोर है, यहाँ प्रशासक और प्रशासन दोनों पूरी तरह विफल हैं। लाखों रुपये डकारने के बाद भी वेबसाइट पर होल्डिंग टैक्स या ग्रीवांस रिड्रेसल का कोई विकल्प काम नहीं करता।”
क्या कटिहार प्रेम में डूबा है मुरौल का प्रशासन?
मुरौल के पूर्व मुख्य पार्षद प्रत्याशी वीरेंद्र राय ने एक सनसनीखेज आरोप लगाते हुए इस लापरवाही के तार सीधे कार्यपालक पदाधिकारी (EO) के ससुराल से जोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा, “पैसा मुरौल की जनता का लग रहा है और प्रचार कटिहार के बारसोई का हो रहा है। ईओ साहिबा का ससुराल कटिहार में है, इसीलिए स्ट्रीट लाइट से लेकर सीसीटीवी और वेबसाइट तक का सारा काम कटिहार की एजेंसियां ही देख रही हैं।” ### ‘सफेद झूठ‘ बोल रहीं कार्यपालक पदाधिकारी! जब इस संबंध में नगर कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से कह दिया कि उन्होंने बारसोई की तस्वीर नहीं देखी। उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया, जबकि वेबसाइट का स्क्रीनशॉट चिल्ला-चिल्लाकर लापरवाही की गवाही दे रहा है। सवाल यह है कि एक पढ़ी-लिखी अधिकारी को अपनी ही संस्था की वेबसाइट का हाल क्यों नहीं पता? क्या यह ‘अनजान’ बने रहने का नाटक भ्रष्टाचार को ढंकने की एक कोशिश है?
न्यूज भारत टी.वी. के कैमरे पर, तिमूल के पूर्व चेयरमैन एवं नगर पंचायत मुरौल के पूर्व मुख्य पार्षद प्रत्याशी वीरेंद्र राय
मौन साधे ‘माननीय‘ और जनता की बेबसी
नगर पंचायत अध्यक्ष नरेश मेहता इस पूरे विवाद पर अंत-अंत तक बयान देने से बचते रहे। उनकी यह चुप्पी दर्शाती है कि वे भी इस लापरवाही में बराबर के हिस्सेदार हैं। पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार कहते हैं, “बोर्ड की बैठकों में क्या फैसले होते हैं, यह सार्वजनिक नहीं किया जाता। पारदर्शिता का घोर अभाव है और जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है।”
एक नजर: संस्थान के लिए क्या है वेबसाइट का महत्व?
आज के डिजिटल युग में किसी भी सरकारी संस्थान की वेबसाइट उसका ‘डिजिटल चेहरा’ होती है। यह न केवल सूचना का केंद्र है, बल्कि जनता और सरकार के बीच संवाद का एकमात्र पारदर्शी सेतु है। जब वेबसाइट ही गलत तथ्यों और दूसरी जगह की तस्वीरों से भरी हो, तो जनता का भरोसा प्रशासन से उठना लाजमी है। एक आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ही लोग घर बैठे टैक्स जमा करते हैं और अपनी समस्याएं दर्ज कराते हैं, लेकिन मुरौल में यह ‘सेतु’ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।
न्यूज भारत टी.वी. के कैमरे पर, हकीकत बयां करते नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या चार के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार ,एवं सामने लैपटॉप पर ‘बारसोई नगर पंचायत’ की तस्वीर दिखाते हुए,
पार्षद बबलू कुमार का तीखा प्रहार: ‘यह भ्रष्टाचार का जीता-जागता नमूना है‘
इस पूरे मामले में वार्ड संख्या चार के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस लापरवाही को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहा:
“मज़ाक तो सर्वदा से हो रहा है जब से नगर पंचायत बना है। और वेबसाइट जो बना है, उस पर लाखों रुपया का बंदरबांट किया गया है। वेबसाइट कंपनी को पैसा भुगतान कर दिया गया है, लेकिन वेबसाइट पर आज भी बारसोई नगर पंचायत का तस्वीर लगा हुआ है। जब हम लोग आवाज़ उठाते हैं, तो कहा जाता है कि सुधार हो जाएगा, लेकिन सुधार आज तक नहीं हुआ। यह सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार का नमूना है। जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है और धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है।”
बबलू कुमार यहीं नहीं रुके, उन्होंने वेबसाइट पर दिए गए संपर्क विवरणों की पोल खोलते हुए प्रशासनिक गैर-जिम्मेदारी को उजागर किया। उन्होंने बताया कि सरकारी वेबसाइट पर किसी आधिकारिक कार्यालय नंबर के बजाय एक एमटीएस (MTS) कर्मी का निजी नंबर दिया गया है। पार्षद ने सवाल उठाया:
“किसी भी सरकारी वेबसाइट पर कार्यालय का आधिकारिक नंबर या टोल-फ्री नंबर होना चाहिए ताकि जनता अपनी समस्याओं को दर्ज करा सके। एक निजी कर्मी का नंबर देना यह दर्शाता है कि प्रशासन कितना गैर-जिम्मेदार है। यह केवल खानापूर्ति की जा रही है ताकि दिखाया जा सके कि वेबसाइट चल रही है। पारदर्शिता का यहाँ पूरी तरह अभाव है।”
तस्वीर में नगर पंचायत मुरौल के साइट पर प्रदर्शित मोबाइल नम्बर एवं ईमेल
आखिर क्यों गंभीर है यह लापरवाही?
किसी भी सरकारी संस्थान के लिए वेबसाइट उसका डिजिटल हस्ताक्षर होती है। इसे ‘अस्मिता से खिलवाड़’ क्यों कहा जा रहा है, इसे इन बिन्दुओं से समझा जा सकता है:
पहचान की चोरी: मुरौल की जनता का पैसा जिस पोर्टल के रखरखाव के लिए जा रहा है, वह पोर्टल किसी दूसरे जिले की नगर पंचायत का पहचान दिखा रहा है। यह स्थानीय गौरव का अपमान है।
राजस्व की हानि: वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य होल्डिंग टैक्स, ट्रेड लाइसेंस और अन्य नागरिक सुविधाओं को ऑनलाइन करना होता है। जब वेबसाइट ही भ्रमित करने वाली हो, तो राजस्व संग्रह (Collection) प्रभावित होता है।
सुरक्षा और डेटा: एक सरकारी वेबसाइट पर निजी कर्मियों के नंबर होना डेटा सुरक्षा और आधिकारिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
प्रशासनिक दूरदर्शिता का अभाव: यदि अधिकारी अपनी वेबसाइट तक को मॉनिटर नहीं कर पा रहे, तो वे क्षेत्र के भौतिक विकास की निगरानी कैसे करेंगे?
कार्यपालक पदाधिकारी का ‘अनजान‘ रवैया: सवालों के घेरे में बयान
जब इस गंभीर विसंगति को लेकर नगर कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी से जवाब मांगा गया, तो उनका जवाब किसी को भी हैरान कर सकता है। उन्होंने कहा:
“नहीं, बारसोई का तो नहीं आता है। मैं तो जब भी ओपन करती हूँ तो मुरौल नगर पंचायत का ही आता है। इसके रिगार्डिंग मैं बात करती हूँ एजेंसी से। अगर ऐसा है तो उसको देखती हूँ।”
हैरानी की बात यह है कि जिस वेबसाइट को दुनिया देख रही है, जिस पर बारसोई का चित्र स्पष्ट रूप से अंकित है, उसे विभाग की मुख्य अधिकारी ने कभी ‘देखा’ ही नहीं। जब उनसे कटिहार की एजेंसी को काम देने और स्थानीय पार्षदों के असंतोष पर सवाल किया गया, तो उन्होंने संक्षिप्त में कहा:
“कटिहार की एजेंसी नहीं है। यह बिल्कुल गलत है। सारे काम नियमानुसार और पारदर्शिता के साथ ही होते हैं।”
नगर पंचायत मुरौल की कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी न्यूज भारत टी.वी. के कैमरे पर पक्ष रखते हुए बायें से एवं अपने मातहत कर्मचारी से टैब पर साइट खुलवा कर जानकारी लेती , साथ ही के फोन पर नगर पंचायत मुरौल की वेबसाइट मेन्टेनेन्स करने वाली एजेन्सी से बात करती हुई
बयान बनाम हकीकत: ईओ का ‘काल्पनिक‘ डिजिटल लोक
प्रशासनिक लापरवाही का सबसे हास्यास्पद और शर्मनाक पहलू तब सामने आया जब नगर कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी ने कैमरे पर रिकॉर्डेड बयान में एक ऐसी वेबसाइट का जिक्र किया, जिसका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर ‘murol.in-nagarpalika’ नामक साइट का हवाला दिया, जबकि इंटरनेट की दुनिया में इस नाम का कोई पोर्टल मौजूद नहीं है। हकीकत यह है कि मुरौल के नाम पर दो वेबसाइटें ऑनलाइन दिख रही हैं—एक https://muraul.e-nagarpalika.com और दूसरी e-murol.com। विडंबना देखिए कि जिस e-murol.com पर ‘बारसोई नगर पंचायत’ की तस्वीरें और गलत तथ्य भरे पड़े हैं, उसे ईओ साहिबा ने ‘मुरौल की अपनी साइट’ मानने से ही इनकार कर दिया। एक जिम्मेदार पद पर बैठी अधिकारी द्वारा ऐसी ‘काल्पनिक’ वेबसाइट का नाम लेना और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध साक्ष्यों को नकारना यह साफ करता है कि नगर पंचायत मुरौल का आईटी तंत्र और प्रशासनिक नेतृत्व न केवल दिशाहीन है, बल्कि जनता को गुमराह करने में भी माहिर है। जब अधिकारी को अपनी संस्था के सही वेब एड्रेस तक का ज्ञान न हो, तो उस वेबसाइट के नाम पर होने वाले लाखों के भुगतान पर सवाल उठना लाजिमी है।
तकनीकी दिवालियापन: स्मार्ट गवर्नेंस के नाम पर ‘डिजिटल अंधेरा‘
नगर पंचायत मुरौल का यह पूरा प्रकरण केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उस ‘तकनीकी दिवालियापन‘ का प्रमाण है जो सरकारी तंत्र में दीमक की तरह लगा हुआ है। एक तरफ बिहार सरकार और केंद्र सरकार ‘स्मार्ट सिटी’ से लेकर ‘स्मार्ट पंचायत’ तक के नारे बुलंद कर रही हैं, डिजिटल भुगतान और पारदर्शी शासन के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मुरौल की हकीकत इन दावों के गाल पर एक तमाचा है।
हैरानी की बात यह है कि नगर पंचायत के सबसे जिम्मेदार पद पर बैठी कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी को खुद यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी जनता किस पोर्टल का उपयोग करे। कैमरे पर उन्होंने जिस ‘murol.in-nagarpalika’ का नाम लिया, वह अस्तित्वहीन है। यह स्थिति उस जनता के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है, जो अपना होल्डिंग टैक्स या अन्य सरकारी शुल्क ईमानदारी से जमा करना चाहती है। जब विभाग के मुखिया को ही ‘सही डिजिटल पते’ का ज्ञान न हो, तो आम नागरिक ठगी और भ्रम का शिकार क्यों न हो?
यह तकनीकी दिवालियापन ही है कि लाखों रुपये वेबसाइट मेंटेनेंस के नाम पर डकारे जा रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर पहचान किसी और शहर (बारसोई) की है। यह दर्शाता है कि प्रशासन के लिए ‘डिजिटल’ होने का मतलब केवल एक वेबसाइट बनवाना और भुगतान करना है, उसकी गुणवत्ता और सत्यता से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। एक पढ़े-लिखे अमले के होते हुए ऐसी अंधेरगर्दी यह साबित करती है कि मुरौल नगर पंचायत में ‘स्मार्टनेस’ केवल फाइलों तक सीमित है, जबकि हकीकत में यहाँ ‘डिजिटल अंधेरा‘ छाया हुआ है।
न्यूज भारत टी.वी. के कैमरे पर, हकीकत बयां करते नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या तीन के पार्षद आनंद कंद साह
पार्षद आनंद कंद साह और वीरेंद्र राय के गंभीर आरोप
वार्ड संख्या तीन के पार्षद आनंद कंद साह ने तो यहाँ तक कह दिया कि नगर पंचायत का नींव ही कमजोर है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ “काला अक्षर भैंस बराबर” वाली स्थिति है। उनके अनुसार, प्रशासक और प्रशासन दोनों पूर्ण रूप से विफल हैं और उन्हें इस बात की फुर्सत नहीं है कि वे देखें कि सरकारी पोर्टल पर क्या चल रहा है।
वहीं, पूर्व प्रत्याशी वीरेंद्र राय ने सीधे तौर पर ‘कटिहार कनेक्शन’ पर ऊँगली उठाई। उन्होंने दावा किया कि मुरौल नगर पंचायत का पैसा कटिहार के लोगों और एजेंसियों को फायदा पहुँचाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है, क्योंकि कार्यपालक पदाधिकारी का ससुराल कटिहार में है। उन्होंने चुनौती दी कि ईओ साहिबा कैमरे के सामने आकर टेंडर और भुगतान का ब्योरा जनता को दें।
नगर पंचायतअध्यक्ष की चुप्पी: मौन सहमति या लाचारी?
नगर पंचायत के अध्यक्ष नरेश मेहता इस पूरे विवाद के केंद्र में होने के बावजूद मौन साधे हुए हैं। एक निर्वाचित प्रतिनिधि के नाते यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे जनता के टैक्स के पैसे का हिसाब लें। लेकिन उनका बयान देने से बचना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं इस ‘महालापरवाही’ में वे भी बराबर के हिस्सेदार हैं।
अस्मिता का सौदा: किसी और की पहचान कब तक ढोएगा मुरौल?
किसी भी क्षेत्र की अस्मिता उसके इतिहास, भूगोल और उसकी अपनी पहचान से जुड़ी होती है। लेकिन नगर पंचायत मुरौल के सरकारी पोर्टल की सूरत देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन की नजर में मुरौल की अपनी कोई विशिष्ट पहचान है ही नहीं। अपनी वेबसाइट पर किसी दूसरे नगर पंचायत (बारसोई) की तस्वीर को बेशर्मी से ढोना, केवल एक ‘अपलोड’ की गलती नहीं है, बल्कि यह मुरौल के प्रत्येक नागरिक के स्वाभिमान पर सीधी चोट है।
नगर पंचायत मुरौल के कार्यालय का एक दृश्य
क्या मुरौल इतना विपन्न है कि उसके पास अपनी एक तस्वीर तक नहीं? क्या यहाँ की हरियाली, यहाँ की सड़कें या यहाँ के गौरवशाली संस्थान (जैसे ढोली एग्रीकल्चर कॉलेज) इतने कमतर हैं कि उन्हें वेबसाइट पर जगह देने के बजाय कटिहार के बारसोई का सहारा लेना पड़ा? यह स्थिति दर्शाती है कि वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारियों के लिए मुरौल केवल एक ‘रेवेन्यू कोड’ या ‘फाइल का नाम’ मात्र है। उनके लिए इस मिट्टी की गरिमा का कोई मूल्य नहीं है।
जब मुरौल का आम नागरिक टैक्स भरता है, तो वह बदले में केवल सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान और अपनी पहचान की सुरक्षा भी चाहता है। लेकिन जब उसे अपनी ही सरकारी वेबसाइट पर किसी दूसरे शहर का चेहरा देखना पड़ता है, तो यह ‘अस्मिता के सौदे’ जैसा प्रतीत होता है। प्रशासन का यह रवैया साफ़ संदेश देता है कि उनके लिए मुरौल की विशिष्टता और यहाँ के लोगों की भावनाएं कोई मायने नहीं रखतीं। यह मानसिक गुलामी और प्रशासनिक आलस का वह चरम है, जहाँ लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी हम अपनी पहचान तक गिरवी रख देते हैं।
यह खबर केवल एक वेबसाइट की तस्वीर बदलने की नहीं है, बल्कि उस कार्यप्रणाली को बदलने की है जहाँ जनता के पैसे को अपनी जागीर समझकर लुटाया जाता है। अगर एक पढ़ा-लिखा प्रशासनिक अमला अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर दूसरे शहर की तस्वीर नहीं पहचान पा रहा, तो यह उनकी योग्यता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।
पढ़े-लिखे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की फौज होने के बावजूद अगर ऐसी भारी चूक हो रही है, तो यह ‘काला अक्षर भैंस बराबर’ वाली कहावत को चरितार्थ करता है। क्या जिला प्रशासन इस ‘वेबसाइट घोटाले’ और कटिहार कनेक्शन की जांच कराएगा? या मुरौल की जनता इसी तरह अपनी पहचान के लिए तरसती रहेगी?
पार्षद बबलू कुमार की बातों ने स्पष्ट कर दिया है कि नगर पंचायत मुरौल में पारदर्शिता केवल कागजों तक सीमित है। अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन जागता है या मुरौल की जनता बारसोई के साये में ही ‘डिजिटल विकास’ का आनंद लेती रहेगी।
तस्वीर में नगर पंचायत मुरौल के वेबसाइट के स्क्रीन शॉट का एक विहंगम दृश्य
स्थानीय बलिराम भगत (बी.आर.बी.) महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा बृहस्पतिवार को महापंडित राहुल सांकृत्यायन की जयंती अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर ‘महापंडित राहुल सांकृत्यायन: जीवन, दर्शन और साहित्य’ विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
ज्ञानानुसंधान के प्रतीक थे महापंडित: प्राचार्य
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो० जगदीश प्रसाद वैश्यंत्री ने राहुल सांकृत्यायन के व्यक्तित्व को विलक्षण बताते हुए कहा कि वे ज्ञान और अनुसंधान के साक्षात् प्रतीक थे। प्राचार्य ने उनके जीवन-दर्शन पर जोर देते हुए कहा, “महापंडित राहुल सांकृत्यायन का संपूर्ण जीवन-दर्शन हमें निरंतर गतिशीलता और जिज्ञासा का संदेश देता है। उनका ‘घुमक्कड़ी शास्त्र’ मात्र पर्यटन नहीं था, बल्कि ज्ञान की खोज और मानवीय संस्कृति को समझने का एक अद्वितीय माध्यम था। उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक है और युवा पीढ़ी को ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित करता है।”
बहुआयामी व्यक्तित्व पर चर्चा
संगोष्ठी के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी महापंडित राहुल सांकृत्यायन के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने हिंदी साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान को रेखांकित किया। यह बताया गया कि उनके ‘घुमक्कड़ी शास्त्र’ और अनुवाद कार्यों के माध्यम से न केवल हिंदी साहित्य समृद्ध हुआ, बल्कि पाठकों को विभिन्न देशों, समाजों और भौगोलिक परिस्थितियों को जानने-समझने का एक नया दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। उन्हें हिंदी साहित्य के विकास में एक मील का पत्थर माना गया।
प्रस्तुति और उपस्थिति
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और अतिथियों के स्वागत से हुई। संगोष्ठी में स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के छात्र-छात्राओं ने राहुल सांकृत्यायन के साहित्य और दर्शन पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इन छात्रों में अभिषेक, विशाल, मृत्युञ्जय, रितु, नेहा, ज्योति, उन्नति, पूजा, प्रियंका, काजल, मुस्कान, सोनम, सरस्वती, सोनी, रूपा, सपना, सीता और संगीता शामिल थीं।
शिक्षकों और कर्मचारियों का योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगोष्ठी में प्रो० विकास कुमार, प्रो० शकील अहमद, डॉ० स्वीटी, डॉ० सीरीन, डॉ० शबनम, डॉ० विंध्याचल साह, एच० एन० शुक्ला, डॉ० बागीरथ, उलाष्टी, ज्योति प्रसाद, डॉ० नरेश और डॉ० ममता सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे। उन्होंने महापंडित राहुल सांकृत्यायन के योगदान पर अपने विचार साझा किए।
धन्यवाद ज्ञापन
संगोष्ठी के अंत में हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. संजय प्रसाद ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी के सहयोग की सराहना की।
मुजफ्फरपुर। जिला कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व जिला महासचिव स्व. हरिचंद प्रसाद सिंह के निधन से राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई है। वे महमदपुर बदल पंचायत के ग्राम महमदपुर मोहन के निवासी थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही जिला एवं प्रखंड कांग्रेस कमेटी के नेताओं व कार्यकर्ताओं का जमावड़ा उनके आवास पर लग गया।
पार्थिव शरीर पर अर्पित की पुष्पांजलि
गुरुवार को जिला कांग्रेस कमेटी एवं प्रखंड कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने स्व. सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उपस्थित नेताओं ने उनके पार्टी के प्रति समर्पण और सामाजिक कार्यों को याद करते हुए इसे कांग्रेस परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया।
शोक संवेदना व्यक्त करने वाले प्रमुख नेता
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में मुख्य रूप से निम्नलिखित गणमान्य उपस्थित थे: अलख निरंजन शर्मा (मुरौल प्रखंड अध्यक्ष),मोहन पासवान (अध्यक्ष, जिला अनुसूचित जाति विभाग),रीमा भारती (सरपंच, पिलखी),सुरेश चंचल (पूर्व विधायक),इसके अलावा शोक सभा में शिवजी राय, प्रेम मिश्रा, सीमा सरोज, अजीत सिंह, सत्रोहन सिंह, मनीष कुमार सहित दर्जनों कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और दिवंगत नेता के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया।
समस्तीपुर | 9 अप्रैल, 2026 नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होते ही समस्तीपुर के निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब पर डाले जा रहे अतिरिक्त बोझ और मनमानी के खिलाफ नागरिक समाज ने निर्णायक लड़ाई का ऐलान कर दिया है। किताबों, ड्रेस और अन्य शिक्षण सामग्रियों में भारी कमीशनखोरी का आरोप लगाते हुए संगठन ने आगामी 15 अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
बीते पांच अप्रैल को समस्तीपुर में नागरिक समाज के द्वारा किए गये प्रदर्शन की फाइल फोटो
NCERT को दरकिनार कर कमीशन का खेल
नागरिक समाज के सह-संयोजक सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जिलाधिकारी, अनुमंडलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भेजकर इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि स्कूल संचालक जानबूझकर सस्ती NCERT किताबों के बजाय निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें चला रहे हैं। इन किताबों, ड्रेस, टाई, बेल्ट और डायरी पर प्रिंट रेट वास्तविक लागत से कई गुना अधिक अंकित कराया जाता है, जिसका सीधा मुनाफा स्कूल संचालकों को कमीशन के रूप में मिलता है।
अभिभावकों पर बनाया जा रहा है दबाव
आरोप है कि स्कूलों ने सेटिंग के तहत कुछ विशेष अस्थाई दुकानें तय कर रखी हैं, जहाँ से सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जाता है। सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने इसे नई शिक्षा नीति की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह शिक्षा का व्यवसायीकरण है।
अव्यवस्थाओं के बीच ‘अवैध’ वसूली
नागरिक समाज ने स्कूलों की आंतरिक अव्यवस्थाओं पर भी प्रहार किया है:
नियमों की धज्जियां: शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत 25% गरीब बच्चों के नामांकन की अनदेखी की जा रही है।
सुविधाओं का टोटा: कई स्कूलों में लैब, लाइब्रेरी, शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।
अकुशल स्टाफ: कम वेतन के लालच में अप्रशिक्षित शिक्षकों से शिक्षण कार्य कराया जा रहा है।
फीस का बोझ: री-एडमिशन, डेवलपमेंट चार्ज और सालाना शुल्क के नाम पर मनमानी वसूली जारी है।
आंदोलन की रूपरेखा
नागरिक समाज ने चेतावनी दी है कि यदि इन छात्र-विरोधी गतिविधियों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा।
कार्यक्रम: विशाल जुलूस एवं प्रदर्शन
तिथि: 15 अप्रैल 2026 (बुधवार)
समय: शाम 5:00 बजे
स्थान: स्टेडियम गोलंबर से समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) तक
“अभिभावकों का शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को जवाब देना होगा कि नियमों को ताक पर रखकर स्कूलों को लूट की छूट कैसे मिली हुई है।” — सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सह-संयोजक, नागरिक समाज